1. Hindi News
  2. भारत
  3. राजनीति
  4. सेनाध्यक्ष के चयन को सरकार ने ठहराया सही, कहा आतंकवाद से लड़ने का तर्जुबा है आधार

सेनाध्यक्ष के चयन को सरकार ने ठहराया सही, कहा आतंकवाद से लड़ने का तर्जुबा है आधार

मोदी सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को बतौर अगला सेना अध्यक्ष नियुक्ति करने के फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा है कि ये निर्णय पूरी तरह से योग्यता के आधार पर किया गया है।

Bipin Rawat- India TV Hindi
Bipin Rawat

मोदी सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को बतौर अगला सेना अध्यक्ष नियुक्ति करने के फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा है कि ये निर्णय पूरी तरह से योग्यता के आधार पर किया गया है। सरकार ने ये भी कहा है कि नियुक्ति सुरक्षा हालातों और आवश्यकताओं के आधार पर की गई है। 

ग़ौर तलब है कि कांग्रेस और वाम दलों ने बिपिन रावत की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल नहीं रखा गया।  

रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की नियुक्ति सेना कमांडर रैंक के अधिकारियों के एक पैनल में से की गई है। सेना कमांडरों के रैंक के अधिकारियों के पैनल में सभी अधिकारी सक्षम हैं और सर्वाधिक योग्य का चयन किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान सुरक्षा स्थिति में, आतंकवाद का मुकाबला करने और आतंकवाद विरोधी मुद्दे प्रमुख हैं।

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने ट्विटर पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आर्मी चीफ की नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया? क्यों लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अली हरीज की जगह बिपिन रावत को प्राथमिकता दी गई। पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह के बाद सबसे वरिष्ठ है। दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरीज अगले सबसे वरिष्ठ हैं।

पाक अधिकृत कश्मीर में की गई सर्जिकल स्टाइक में थी भूमिका

बताया जाता है कि लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद हैं। दरसअल, पिछले साल म्यांमार में नगा आतंकियों के खिलाफ की गई सफल सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही वे पीएम की निगाहों में आ गए थे। पाक अधिकृत कश्मीर में की गई सर्जिकल स्टाइक में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी।

पूर्वोत्तर में घुसपैठ रोधी अभियानों में दस साल का अनुभव

पूर्वोत्तर मामलों के भी विशेषज्ञ-चीन, पाकिस्तान सीमा के अलावा रावत को पूर्वोत्तर में घुसपैठ रोधी अभियानों में दस साल तक कार्य करने का अनुभव है। पिछले साल जून में जब मणिपुर में नगा आतंकियों ने 18 सैनिकों को मार गिराया था तो तीन दिन के भीतर ही रावत के नेतृत्व में म्यांमार में घुसकर नगा आतंकी शिविरों को नष्ट किया गया था जिसमें 38 नगा आतंकी मारे गए थे।

पाकिस्तान के साथ चीन बॉर्डर की भी समझ

रावत 1978 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। अपने लंबे करियर में उन्होंने पाकिस्तान सीमा के साथ-साथ चीन सीमा पर भी लंबे समय तक कार्य किया है। वे नियंत्रण रेखा की चुनौतियों की गहरी समझ रखते हैं। साथ ही चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा के हर खतरे से भी वे वाकिफ हैं। इसलिए माना जा रहा है कि वे दोनों सीमाओं की चुनौतियों से निपटने में सफल रहेंगे।

Latest India News