नयी दिल्ली: गेहूं पर आयात शुल्क हटाने के सरकार के फैसले के खिलाफ कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों के हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही आज एक बार के स्थगन के बाद अपरान ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
माकपा, कांग्रेस, बसपा, सपा, जदयू आदि दलों ने कहा कि जब देश में गेहूं का पर्याप्त भंडार है तो ऐसे समय आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से शून्य किए जाने से देश के किसान प्रभावित होंगे।
विपक्षी सदस्यों ने कहा कि गेहूं की फसल के सीजन से पहले उठाए गए इस कदम से अमेरिका, फ्रांस, रूस और यूक्रेन जैसे देशों की कंपनियां लाभान्वित होंगी।
,खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि देश में गेहूं की कोई कमी नहीं है और फैसला घरेलू मूल्य को ध्यान में रखकर किया गया जिसमें हालिया हफ्तों से बढ़ोतरी की प्रवृत्ति देखने को मिल रही थी।
उन्होंने कहा कि देश में गेहूं की कोई कमी नहीं है और यह कोई स्थाई फैसला नहीं है।
कृषि राज्यमंत्री पुरषोत्तम रूपाला ने कहा कि फैसला आवश्यक हो गया था क्योंकि घरेलू मूल्य बढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि मूल्यों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार बाजार में हस्तक्षेप करती है। यदि किसानों को समस्या होती है तो उनके हित में आयात शुल्क के फैसले पर पुनर्विचार किया जाएगा।
इससे पूर्व इस मुद्दे को उठाते हुए माकपा के सीताराम येचुरी ने कहा कि उन्होंने फैसले पर चर्चा के लिए नियम 267 के तहत एक नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से भारत के किसान प्रभावित होंगे और बहुराष्ट्रीय कंपनियां लाभान्वित होंगी।
उन्होंने कहा कि खुदरा बाजार में नोटबंदी की वजह से मूल्य बढ़ रहा है। नोटबंदी के चलते किसान पहले से ही बुरी तरह प्रभावित हैं। नकदी नहीं होने की वजह से वे बीज एवं खाद खरीद पाने में असमर्थ हैं।
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