अहमदाबाद: गुजरात में स्थानीय निकायों के महत्वपूर्ण चुनाव के लिए मतगणना आज होगी। राज्य में पटेल आरक्षण आंदोलन की पृष्ठभूमि में यह सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के लिए एक अग्निपरीक्षा है। छह नगर निगमों के लिए मतदान 26 नवम्बर को हुआ था जबकि 31 जिला पंचायतों, 230 तालुका पंचायतों और 56 नगर पालिकाओं के लिए मतदान 29 नवम्बर को हुआ था।
छह नगर निगमों में मात्र 45 फीसदी मतदान हुआ था लेकिन अन्य स्थानों पर यह 60 फीसदी से अधिक था। अधिकारियों ने कहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरे राज्य में कई स्थानों पर मतगणना के लिए सभी तैयारियां कर ली हैं। इस चुनाव को बीजेपी और मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि यह पटेल आरक्षण आंदोलन के बाद हो रहा है। नरेंद्र मोदी की जगह आनंदीबेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है।
बीजेपी के खिलाफ पटेल समुदाय की नाराजगी का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस राज्य में निकायों में वापसी की उम्मीद कर रही है। पटेल समुदाय को ओबीसी कोटे में शामिल करने की मांग कर रहे पटेल नेताओं ने चुनाव से पहले समुदाय के सदस्यों से बीजेपी के खिलाफ और कांग्रेस को वोट करने की अपील की थी। वर्तमान समय में सभी छह नगर निगमों, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट, जामनगर और भावनगर में बीजेपी का नियंत्रण है। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में अन्य स्थानीय निकायों में अधिकतर पर भी बीजेपी का नियंत्रण है।
इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को दाहोद और महिसागर जिलों में एक-एक मतदान केंद्र पर फिर से मतदान कराया। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव एम वी जोशी ने कहा कि पिछले रविवार को कुछ लोग दाहोद के जालोद तहसील के घोडिया गांव में एक बूथ में जबर्दस्ती घुस गए थे और ईवीएम मशीन तोड़ दी थी जब जिला एवं तालुका पंचायतों के लिए मतदान चल रहा था। इसी तरह की घटना महिसागर में संतरामपुर के नानी भुगेडी गांव में हुई थी। घोडिया में 854 पंजीकृत मतदाता हैं जबकि नानी भुगेड़ी में 921 मतदाता हैं।
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