दिल्ली के रामलीला मैदान में नरेंद्र मोदी के सियासी दुश्मन 1 नवंबर को एक महारैली करने वाले हैं। कांग्रेस का दावा है कि इस रैली में लाखों लोग आएंगे। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्यों से कांग्रेस पार्टी बड़ी संख्या में भीड़ का हुजूम लेकर दिल्ली आने वाली है। उधर, मोदी सरकार ने इस बवाल से निपटने की तैयारी कर ली है। आज (शनिवार को) कुछ देर पहले ही दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर में गृहमंत्री अमित शाह की हाई लेवल सिक्योरिटी मीटिंग खत्म हुई है। इस मीटिंग में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अलावा, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे।
बवाल हुआ तो उपद्रवियों पर हो सकता है एक्शन
बता दें कि 3 घंटों तक चली इस हाई लेवल मीटिंग में पिछले 5 महीनों के दौरान हुए प्रदर्शन और पुलिसकर्मियों पर हमला जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई है। यानी गृहमंत्री अमित शाह भी 1 नवंबर की तैयारी कर चुके हैं। अगर राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन की बुलाई गई महारैली में इस बार कोई भी बवाल होता है तो एक्शन लिया जा सकता है।
विदेशी टूलकिट पर काम कर रहे राहुल गांधी- BJP
बीजेपी ने भी आज एक बड़ी लाइन ले ली है। राहुल गांधी पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि राहुल पूरी तरह से एक टूलकिट के तौर पर काम कर रहे हैं। एक ऐसी टूलकिट जो विदेशों से ऑपरेट हो रही है। उधर, बीजेपी का सीधा आरोप है कि राहुल गांधी, उनकी पार्टी और इंडिया अलायंस वाले 1 नवंबर को दिल्ली की सड़कों पर अराजकता पैदा करके लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन पैदा करने वाली है।
12 अक्टूबर का प्रदर्शन भी नहीं छोड़ पाया था छाप
क्या 1 नवंबर को इंडिया अलायंस पूरी दिल्ली जाम कर पाएगा या पिछली बार की ही तरह इस बार भी फेल हो जाएंगे। 12 अक्टूबर की तारीख याद कीजिए, जब राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट पर धावा बोला था। उस वक्त भी कांग्रेस ने बहुत दावे किए थे। कांग्रेस और इंडिया अलायंस ने तब क्लेम किया था कि उस दिन दिल्ली की सड़कों पर 50 हजार लोग उतर आए थे। लेकिन वास्तविकता ये थी कि विपक्ष का वो सियासी स्टंट भी फेल हुआ था। मोदी विरोधी 14 पार्टियां मिलकर भी डेढ़ किलोमीटर में सिर्फ 8,000 लोगों की भीड़ जुटा पाई थीं। इस बीच, व्यापारी संघ ने राहुल गांधी को चिट्ठी लिखी है और 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली को स्थगित करने की मांग की है।
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