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ऊपरी असम में चला 'मोदी मैजिक'! चाय बागान के वोटरों में बीजेपी ने लगाई सेंध, बिखर गई कांग्रेस

ऊपरी असम के चाय बागान इलाकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी पहुंच और केंद्रित रणनीति का असर अब चुनावी रुझानों/नतीजों में साफ दिख रहा है। खासकर डिब्रूगढ़ के चाय बेल्ट में बीजेपी ने पारंपरिक रूप से कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में भी मजबूत बढ़त बना ली है।

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Image Source : PTI असम चाय बगान में पीएम मोदी

Assam assembly election results: असम विधानसभा चुनाव में एक बार फिर भगवा लहर ने कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। अब तक के रुझानों/नतीजों में बीजेपी एक फिर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। इस चुनाव में प्रचार के दौरान पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने जमीनी कार्यकर्ताओं में और जनता में पार्टी के भरोसे को मजबूत किया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार ने पार्टी को अहम बढ़त दिला दी। ऊपरी असम में चाय बगानों में काम करने वालों के साथ पीएम मोदी के सीधे कनेक्शन ने जबरदस्त राजनीति फायदा पहुंचाया, जिसका असर नतीजों में देखने को मिला।

ऊपरी असम के इलाके में बीजेपी ने बनाई मजबूत पकड़

डिब्रूगढ़ के चाय बेल्ट में प्रधानमंत्री मोदी का मजदूरों के साथ सीधा संवाद, कल्याणकारी योजनाओं का जमीन के स्तर पर क्रियान्यवन और लगातार राजनीतिक संपर्क ने बीजेपी को मजबूत समर्थन दिलाया है। यही वजह है कि यह इलाका अब बीजेपी के लिए एक मजबूत गढ़ के रूप में उभर रहा है। 

Image Source : PTIचाय बगान श्रमिकों के बीच पीएम मोदी

पॉलिटिकल बैलेंस पूरी तरह से बदला

चाय बेल्ट में PM मोदी की खास पहुंच ने पॉलिटिकल बैलेंस को पूरी तरह से बदल दिया है। भारतीय जनता पार्टी इस क्षेत्र की सभी 6 सीटों (डिब्रूगढ़, चबुआ-लाहोवाल, दुलियाजान, टिंगखोंग, नाहरकटिया, खोवांग)  पर बड़े अंतर से आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस पूरी तरह से बिखर चुकी है।

वर्षों से उपेक्षित थे चाय बागान के मजदूर

इन सीटों पर बीजेपी की बढ़त न केवल स्थिर है बल्कि कई जगहों पर अंतर भी काफी बड़ा बताया जा रहा है, जो स्पष्ट संकेत देता है कि वोटरों का झुकाव एकतरफा हो चुका है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चाय बागान मजदूर लंबे समय से विकास और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर उपेक्षा महसूस कर रहे थे। 

Image Source : PTIअसम के चाय बगान में मजदूरों के बीच पीएम मोदी

भारतीय जनता पार्टी ने इन वर्गों को सीधे टारगेट करते हुए योजनाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के जरिए भरोसा जीतने की कोशिश की, जिसका फायदा अब चुनावी नतीजों में दिख रहा है। ऊपरी असम में चाय बागान वोट का यह एकतरफा झुकाव आने वाले चुनावों में भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है और राज्य की राजनीति में बीजेपी की स्थिति को और मजबूत कर सकता है।

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