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जयंती विशेष: वो स्कैंडल जिसने बाबू जगजीवन राम को नहीं बनने दिया प्रधानमंत्री, अधूरा रह गया सपना

बाबू जगजीवन राम, एक समय में देश के प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे की पंक्ति के नेता माने जाते थे लेकिन उनके बेटे के एक स्कैंडल ने उनका पीएम बनने का सपना तोड़ दिया।

Babu Jagjivan Ram- India TV Hindi
Image Source : CONGRESS/FILE बाबू जगजीवन राम

नई दिल्ली: भारत के पहले दलित उप-प्रधानमंत्री रहे बाबू जगजीवन राम की आज जयंती है। उनका जन्म 5 अप्रैल 1908 को चंदवा, आरा (बिहार) में हुआ था। वह अपने जीवनकाल में स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, रक्षा मंत्री और संविधान सभा के सदस्य भी रहे थे। 

बाबू जगजीवन राम के जीवनकाल की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक ये भी थी कि उनके बेटे सुरेश राम के सेक्स स्कैंडल ने उनके प्रधानमंत्री बनने के सपने को तोड़ दिया था। नीरजा चौधरी की किताब 'हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड' में इस घटना का जिक्र है।

क्यों पीएम नहीं बन पाए जगजीवन राम?

मोरारजी देसाई के इस्तीफे के बाद जगजीवन राम वो नेता थे, जो प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदारों में से एक थे। इस बात को इंदिरा गांधी और चरण सिंह भी बखूबी समझते थे लेकिन बाबू जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम की एक कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की के साथ सेक्स तस्वीरें सामने आ गई थीं और संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी ने सुरेश राम की इन तस्वीरों को अपनी पत्रिका सूर्या में छाप भी दिया था। 

इसके बाद बाबू जगजीवन राम का प्रधानमंत्री बनने का सपना अधूरा रह गया था। दरअसल ये वो दौर था जब जगजीवन राम बहुत पावरफुल थे और देश के रक्षा मंत्री थे। उनके बेटे की खबर को उस वक्त अन्य मीडिया संस्थानों ने इतनी प्रमुखता से नहीं छापा, जितना मेनका गांधी की पत्रिका सूर्या ने छापा। सूर्या पत्रिका ने तो सुरेश राम की उनकी गर्लफ्रेंड के साथ न्यूड तस्वीरें ही छाप दीं, जिससे सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया।

'एक और बेटे ने अपने बाप को डुबो दिया'

पत्रिका में इस बात का भी जिक्र किया गया था कि सुरेश राम एक शादीशुदा 42 साल के शख्स हैं, जो पहले से शादीशुदा हैं, वहीं उनकी गर्लफ्रेंड की उम्र महज 20 साल है। इस मामले ने जगजीवन राम की गुडविल पर काफी असर डाला और वह पीएम पद से दूर हो गए। इस मामले पर जगजीवन राम ने खुद अपने दोस्त कृष्णकांत से कहा था, 'एक और बेटे ने अपने बाप को डुबो दिया।'

हैरानी की बात ये है कि इन तस्वीरों को छापने के बाद सूर्या पत्रिका ब्लैक में बिकी थी क्योंकि इसकी सेल बहुत बढ़ गई थी। एक किस्सा ये भी है कि जगजीवन राम ने इंदिरा गांधी के पास एक संदेश भिजवाया था कि सुरेश की तस्वीरें सूर्या मैगजीन और नेशनल हेराल्ड में न छापी जाएं लेकिन ऐसा हो नहीं सका। इस किस्से के बारे में खुशवंत सिंह ने अपनी जीवनी ‘ट्रुथ, लव एंड लिटिल मेलिस’ में बताया है।

6 जुलाई 1986 में 78 साल की उम्र में बाबू जगजीवन राम का निधन हो गया था। अपने सियासी जीवन में उन्होंने तमाम बड़े पदों पर सेवाएं दीं और सियासत की बुलंदियों तक पहुंचे।

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