डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का कहना है कि 'CEC ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना होगा, उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।' स्टालिन का कहना है कि DMK ने SIR के नाम पर वोटर लिस्ट से करोड़ों वोटरों के नाम हटाने के कदम का लगातार विरोध किया है। DMK प्रमुख स्टालिन ने एक बयान में आरोप लगाया है कि 'SIR की प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां थीं और इससे बड़े पैमाने पर अशांति फैली, खासकर पश्चिम बंगाल में।'
स्टालिन का दावा है कि 'एक अखबार ने सबूतों के साथ जो जानकारी छापी है, उससे SIR प्रक्रिया के बाद हुए हर विधानसभा चुनाव के नतीजों पर शक पैदा हो गया है।' चुनाव आयोग के अंदर 'राजनीतिक दखल' साफ दिख रहा है, SIR प्रक्रिया रोकी जानी चाहिए: स्टालिन। स्टालिन ने SIR पर कहा, 'DMK चुनाव आयोग के भीतर हुई सभी घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग करती है; जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।'
सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने बुधवार को क्रिकेट का उदाहरण देते हुए 2023 के उस कानून पर चिंता जताई, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) को चुनने वाले पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को बाहर रखा गया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने इस बात पर अलग-अलग राय दी कि क्या इस कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को एक बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए।
जानें क्या है मामला
मीडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और आयोग की कुछ आंतरिक प्रक्रियाओं को लेकर दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही जहां विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और पूरे आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाया, वहीं चुनाव आयोग ने इस पर सफाई दी है। आयोग का कहना है कि फैसलों के दौरान लिखित टिप्पणियां, असहमति और सुझाव दर्ज कराना उसकी एक स्वाभाविक और लोकतांत्रिक आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
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