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Coffee Par Kurukshetra: सोनिया गांधी से मुलाकात, क्या है ममता बनर्जी का प्लान? देखें चर्चा

'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' में ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात को लेकर चर्चा हुई, जिसमें इस ओर भी ध्यान गया कि आखिर इस मुलाकात के सियासी मायने क्या हैं?

नई दिल्ली: इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो 'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' में ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की हालिया मुलाकात को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बताया गया कि दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई, जिसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। चर्चा में दो प्रमुख संभावनाएं सामने आईं। पहली, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश हो रही है। दूसरी, ममता बनर्जी INDIA गठबंधन को अधिक संगठित और संरचित रूप देने की पक्षधर हैं। इस चर्चा में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा, पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर के साथ-साथ आलोक मेहता और सिफोलॉजिस्ट अमिताभ तिवारी मौजूद रहे।

INDIA गठबंधन को नया ढांचा देने की कोशिश

पैनल में यह भी कहा गया कि ममता बनर्जी चाहती हैं कि INDIA गठबंधन केवल लोकसभा चुनावों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका एक स्थायी ढांचा बने। गठबंधन का सचिवालय, विभिन्न समितियां, मीडिया विंग और राज्यों में सक्रिय संगठनात्मक व्यवस्था विकसित की जाए। सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा हुई कि ममता बनर्जी गठबंधन की संयोजक बनने की इच्छुक हैं।

संयोजक पद को लेकर पुरानी बहस फिर चर्चा में

इस संदर्भ में पुरानी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया। कहा गया कि INDIA गठबंधन के शुरुआती दौर में जेडीयू नेता नीतीश कुमार को संयोजक बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन उस समय यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया। पैनलिस्टों का मत था कि कांग्रेस नेतृत्व, विशेष रूप से राहुल गांधी, किसी अन्य नेता को गठबंधन का प्रभावी संचालन सौंपने के पक्ष में नहीं दिखाई देता।

कांग्रेस-टीएमसी रिश्तों का पुराना इतिहास

चर्चा के दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के पुराने संबंधों पर भी बात हुई। पैनलिस्टों ने याद दिलाया कि 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ममता बनर्जी का समर्थन किया था, लेकिन बाद में दोनों दलों के संबंधों में दूरी आ गई। कांग्रेस के भीतर अब भी यह भावना मौजूद बताई गई कि ममता बनर्जी ने अतीत में पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया।

क्या ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका तलाश रही हैं?

पैनल में यह भी कहा गया कि वर्तमान परिस्थितियों में ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। कुछ वक्ताओं का मानना था कि पश्चिम बंगाल में बढ़ती राजनीतिक चुनौतियों और पार्टी के भीतर संभावित असंतोष के कारण वे राष्ट्रीय स्तर पर नए राजनीतिक समीकरण तलाश रही हैं।

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका

कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव का मुद्दा भी चर्चा का केंद्र बना। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर पैनलिस्टों ने सवाल उठाए। जानकारी दी गई कि उन पर अपने हलफनामे में एक आपराधिक मामले की जानकारी न देने का आरोप था, जिसके आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया। इसके बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया।

नामांकन रद्द होने पर संगठनात्मक सवाल

पैनलिस्टों ने कांग्रेस संगठन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में नामांकन प्रक्रिया के दौरान ऐसी चूक होना गंभीर राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरी को दर्शाता है। चर्चा में यह भी कहा गया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के बीच बेहतर समन्वय होता तो ऐसी स्थिति टाली जा सकती थी।

विपक्षी राजनीति के सामने नई चुनौतियां

कार्यक्रम का निष्कर्ष यह रहा कि विपक्षी राजनीति इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। एक ओर क्षेत्रीय दल अपनी भूमिका और प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस भी अपने संगठन और नेतृत्व को लेकर नई चुनौतियों का सामना कर रही है।

डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिये गये वीडियो पर क्लिक करें।

(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)

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