8% की रफ्तार से बढ़ती इकोनॉमी, क्या सरकार के पक्ष में बन रहा नया माहौल? Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा
‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ में इस बार चर्चा देश की अर्थव्यवस्था के आंकड़ों, विपक्ष की आलोचना और इन आंकड़ों के बाद बदलते राजनीतिक माहौल पर हुई। चर्चा में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर का मुद्दा प्रमुख रहा।
देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े ताजा आंकड़ों ने सियासी बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। 7.8 फीसदी की आर्थिक ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर सरकार जहां इसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रही है, वहीं विपक्ष की ओर से आंकड़ों, महंगाई, रोजगार और आम आदमी की आय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ में इसी मुद्दे पर चर्चा हुई कि क्या मजबूत आर्थिक आंकड़े सरकार के लिए राजनीतिक राहत लेकर आए हैं और क्या बदलते आर्थिक माहौल का असर सियासत पर भी दिखाई दे रहा है। इस दौरान कार्यक्रम में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा के साथ गेस्ट के रूप में वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर मौजूद रहे।
81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन पर बहस
चर्चा की शुरुआत सरकार की ओर से सामने रखे गए आर्थिक आंकड़ों और 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने के मुद्दे से हुई। मेहमानों ने कहा कि अगर सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाया जाता है तो विपक्ष को आंकड़ों के साथ यह भी बताना चाहिए कि कमी कहां है और क्या किया जाना चाहिए था। फूड सिक्योरिटी एक्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि शहरी आबादी के 50 प्रतिशत और ग्रामीण आबादी के 75 प्रतिशत हिस्से को मुफ्त या नाममात्र की दर पर अनाज देने का प्रावधान है।
यह भी तर्क दिया गया कि जब परिवार को दो वक्त के खाने की चिंता कम होती है तो बची हुई आमदनी फल, सब्जी, दूध, बच्चों की पढ़ाई, कपड़े और दूसरी जरूरतों पर खर्च हो सकती है। इससे आर्थिक गतिविधि का पूरा चक्र आगे बढ़ता है।
7.8% ग्रोथ ने ‘डेड इकोनॉमी’ के दावे पर खड़े किए सवाल
चर्चा में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर का मुद्दा भी प्रमुख रहा। मेहमानों ने कहा कि अगर अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकोनॉमी’ कहा जा रहा है तो उसके लिए पैमाना और आधार भी बताया जाना चाहिए। साथ ही यह बात सामने आई कि लगातार कई तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि करीब 7 प्रतिशत या उससे ऊपर बनी रही है।
सेक्टर के स्तर पर भी मैन्युफैक्चरिंग में 9.2 प्रतिशत, बिजली, गैस और वाटर सप्लाई में 8.9 प्रतिशत, कंस्ट्रक्शन में 7.7 प्रतिशत, ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन में 8.5 प्रतिशत तथा फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और आईटी प्रोफेशनल सर्विस में करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि का उल्लेख किया गया। प्राइवेट इन्वेस्टमेंट 12 प्रतिशत और क्रेडिट ग्रोथ 18.3 प्रतिशत बताई गई।
इंफ्रास्ट्रक्चर और महिला वर्कफोर्स का भी जिक्र
आर्थिक गतिविधियों को समझाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण दिया गया। चर्चा में कहा गया कि 2014 तक देश में 74 एयरपोर्ट थे, जबकि अब यह संख्या करीब 157 के आसपास बताई गई। हाईवे निर्माण की रफ्तार 11 किलोमीटर प्रतिदिन से बढ़कर करीब 36 किलोमीटर प्रतिदिन होने की बात कही गई। बिजली की उपलब्धता भी पहले के 11-12 घंटे से बढ़कर औसतन 22 घंटे से ज्यादा बताई गई। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में महिला वर्कफोर्स में करीब 23-24 प्रतिशत की बढ़ोतरी को भी महत्वपूर्ण संकेतक बताया गया।
आंकड़ों के बाद सरकार के लिए बदला माहौल
चर्चा में यह भी कहा गया कि आर्थिक आंकड़ों के सामने आने के बाद सरकार के लिए माहौल फिलहाल बेहतर दिखाई दे रहा है। पहले सरकार पर दबाव और नकारात्मक विमर्श की चर्चा थी, लेकिन प्रदर्शन टलने और आर्थिक वृद्धि के आंकड़े आने के बाद तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आ रही है।
हालांकि मेहमानों ने यह भी माना कि राजनीति स्थिर नहीं रहती। माहौल को संभालना और विरोधाभासों को सही तरीके से मैनेज करना जरूरी है। फिलहाल चर्चा में यही निष्कर्ष सामने आया कि आर्थिक आंकड़ों के बाद सरकार के लिए माहौल बेहतर हुआ है, लेकिन आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार इस माहौल को किस तरह मैनेज करती है।
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(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)
