Coffee Par Kurukshetra: क्या प्रो मुस्लिम हो गई है कांग्रेस? नेतन्याहू के बयान पर मचा बवाल
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि भारत में लोग उन्हें बहुत प्यार करते हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने विरोध शुरू कर दिया और कहा कि सिर्फ पीएम मोदी के इकोसिस्टम में नेतन्याहू को प्यार मिलता है।
इंडिया टीवी के डिबेट शो “कॉफी पर कुरुक्षेत्र” में गुरुवार को कांग्रेस की मुस्लिम वोट बैंक वाली राजनीति पर गंभीर चर्चा हुई। मुद्दा था इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयान का विरोध करने का। इस दौरान इजराइल, कांग्रेस की राजनीति, मुस्लिम वोट बैंक और उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी बात हुई। इंडिया टीवी के सीनियर एग्जक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा के साथ मेहमान प्रदीप सिंह, आलोक मेहता और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पराशर इस चर्चा में शामिल हुए। शो में मौजूद मेहमानों ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करती है और इजराइल को लेकर पार्टी के हालिया बयान इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि भारत में लोग इजरायल को बहुत पसंद करते हैं, लोग उनसे पागलों की तरह प्यार करते हैं। उन्होंने भारत और इजराइल के रिश्तों को अनोखा बताया और कहा कि दुनिया के कई देशों में इजराइल को लेकर विरोध देखने को मिलता है, लेकिन भारत में स्थिति अलग है। इस पर कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नेतन्याहू को यह नहीं कहना चाहिए था कि पूरे भारत में उनके लिए समर्थन है, बल्कि यह समर्थन केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके समर्थकों के बीच है।
प्रो-मुस्लिम राजनीति करती है कांग्रेस
कांग्रेस लगातार ऐसे बयान दे रही है, जिनका मकसद मुस्लिम वोट बैंक को साधना है। प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के फिलिस्तीन और गाजा पर दिए गए बयानों से साफ है कि कांग्रेस अब खुलकर इजराइल विरोधी लाइन ले रही है। प्रियंका गांधी फिलिस्तीन समर्थक बैग लेकर संसद पहुंची थीं। गाजा में इजराइली कार्रवाई को कांग्रेस ने नरसंहार कहा और राहुल गांधी भी लगातार अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं। इससे साफ होता है कि कांग्रेस खुलकर प्रो मुस्लिम राजनीति करने लगी है। कांग्रेस की राजनीति अब “माइनॉरिटी अपीजमेंट” पर केंद्रित हो चुकी है और इजराइल विरोधी बयान उसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
इजराइल और भारत के रिश्तों पर चर्चा
इजराइल ने कई मौकों पर भारत की मदद की है। 1971 के युद्ध से लेकर रक्षा तकनीक, कृषि और आतंकवाद विरोधी सहयोग तक इजराइल भारत का मजबूत साझेदार रहा है। कश्मीर और सुरक्षा मामलों में इजराइल हमेशा भारत के पक्ष में खड़ा रहा है। इसलिए इजराइल के खिलाफ कांग्रेस की आक्रामक भाषा “राजनीतिक स्वार्थ” के अलावा कुछ और नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इजरायल ने भारत की मदद की थी और भविष्य में भी मदद करते रहने की बात कही है। ऐसे में इजरायल से दूरी बनाने की कोई वजह नहीं है, लेकिन कांग्रेस पार्टी अपने वोट बैंक के लिए ऐसा कर रही है।
यूपी चुनाव और हिंदू-मुस्लिम राजनीति
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब कोई माफिया खुलेआम हिंदुओं को धमका नहीं सकता। उन्होंने कहा कि आज माफिया पिस्तौल लहराते हुए, धमका करके, खुली जीप में चल करके किसी हिंदू को धमका नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी माफिया ने किसी धार्मिक आयोजन में व्यवधान डाला तो तय है कि रावण और कंस जैसी उसकी दुर्गति होगी। 21 साल पहले मऊ में दंगे हुए थे। लगभग एक दशक पहले मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और शहाबुद्दीन जैसे माफिया नेताओं का पूरे राज्य में दबदबा हुआ करता था। पहले अपराध और राजनीति का गठजोड़ धार्मिक पहचान के साथ जुड़ा हुआ था। हालांकि, योगी सरकार ने हालात पूरी तरह बदल दिए हैं।
वंदे मातरम् पर राजनीति क्यों?
केरल विधानसभा में वंदे मातरम् को लेकर बवाल हो गया। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शुक्रवार को अपने अभिभाषण से पहले राज्य विधानसभा में वंदे मातरम का पूर्ण गायन न होने पर नाराजगी व्यक्त की, जबकि मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कहा कि राष्ट्रगीत का पूर्ण गीत गाना अनिवार्य नहीं है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मुस्लिम लीग को खुश करने के लिए राष्ट्रवादी प्रतीकों पर भी राजनीति कर रहे हैं। आजादी आंदोलन से जुड़े प्रतीकों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना गलत है।
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(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)
