Coffee Par Kurukshetra: क्या सरकार ने जुटा लिया परिसीमन बिल पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का नंबर? देखें पूरी चर्चा
इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो "कॉफी पर कुरुक्षेत्र" में संसद का विशेष सत्र बुलाने और परिसीमन बिल को लेकर चर्चा हुई। इस पर भी बात हुई कि क्या सरकार ने दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी नंबर जुटा लिए हैं।
नई दिल्ली: इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो "कॉफी पर कुरुक्षेत्र" में बुधवार (5 अगस्त) को इस मुद्दे पर चर्चा हुई कि राहुल गांधी अभी भी पैलेट गन पर और 20 जुलाई की हिंसा की बात कर रहे हैं। अभी तक उनको लगता है कि यही मुख्य मुद्दा है। लेकिन सरकार काफी आगे बढ़ गई है। खबर आई है कि सरकार 15 अगस्त के बाद 3 दिन का एक विशेष संसद सत्र बुलाकर महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल, जिसमें देश की लोकसभा और विधानसभाओं की सीटें बढ़ जाएंगी, वो बिल पास कराना चाहती है। चर्चा में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पराशर के साथ मेहमान के तौर पर आलोक मेहता और अमिताभ तिवारी मौजूद रहे।
तीन दिन का विशेष संसद सत्र बुलाने की तैयारी में कांग्रेस
चर्चा के दौरान दावा किया गया कि सरकार 15 अगस्त के बाद तीन दिन का विशेष संसद सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश किया जा सकता है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि सरकार इन विधेयकों को तभी आगे बढ़ाएगी जब उसे आवश्यक दो-तिहाई समर्थन मिलने का पूरा भरोसा होगा। इसी संदर्भ में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और राहुल गांधी के बीच लगभग एक घंटे की बैठक का भी उल्लेख किया गया, जिसमें विपक्ष के रुख और संसद के गतिरोध पर चर्चा होने की बात कही गई।
DMK समेत कई क्षेत्रीय दलों का दिख रहा सकारात्मक रुख
पैनलिस्टों का कहना था कि सरकार विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, को साथ लेकर चलने का संदेश देना चाहती है ताकि इतने बड़े संवैधानिक बदलावों पर यह आरोप न लगे कि उन्हें केवल बहुमत के बल पर थोप दिया गया। चर्चा में यह भी कहा गया कि डीएमके समेत कुछ क्षेत्रीय दलों के समर्थन को लेकर सकारात्मक संकेत हैं और सरकार सभी प्रमुख दलों से संवाद बनाए हुए है।
गृह मंत्री के बयान पर अड़े हैं राहुल गांधी
दूसरी ओर, राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार 20 जुलाई के कथित छात्र आंदोलन, पैलेट गन के इस्तेमाल और गृह मंत्री अमित शाह के संसद में बयान देने की मांग पर जोर देते रहे। कार्यक्रम में यह तर्क दिया गया कि कांग्रेस अभी भी इन्हीं मुद्दों पर अटकी हुई है, जबकि सरकार का ध्यान अब बड़े विधायी एजेंडे की ओर बढ़ चुका है। वहीं दूसरी राय रखने वाले पैनलिस्टों ने कहा कि गृह मंत्री का बयान मांगना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे सरकार को बचना नहीं चाहिए।
BJP ने राहुल के आरोपों को बताया झूठा
कार्यक्रम के दौरान भाजपा सांसद संबित पात्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी उल्लेख हुआ। उन्होंने दावा किया कि 20 जुलाई के "संसद चलो" आंदोलन के दौरान कोई गोली नहीं चली थी और राहुल गांधी झूठा नैरेटिव पेश कर रहे हैं। पात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल कुछ चुनिंदा छात्र आंदोलनों का समर्थन करती है, जबकि झारखंड में परीक्षा अनियमितताओं से परेशान छात्रों की समस्याओं पर राहुल गांधी चुप हैं। उन्होंने झारखंड की एक छात्रा का उदाहरण देते हुए वहां के छात्रों की मानसिक परेशानी का भी जिक्र किया।
छात्रों के मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं कांग्रेस
चर्चा में यह भी कहा गया कि भाजपा अब विपक्ष के हर आरोप का तुरंत जवाब देने की रणनीति अपना रही है, खासकर युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर। पैनलिस्टों के अनुसार, सरकार चाहती है कि मौजूदा विवादों से आगे बढ़कर महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े राजनीतिक एजेंडे पर राष्ट्रीय बहस केंद्रित हो जाए। हालांकि, यह भी माना गया कि कांग्रेस इन मुद्दों को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही और वह अपने समर्थकों के सामने यह संदेश देना चाहती है कि उसके दबाव में सरकार को कुछ कदम उठाने पड़े।
परिसीमन विधेयक कैसे होगा पास?
परिसीमन विधेयक पर संभावित राजनीतिक गणित पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पैनलिस्टों ने कहा कि यदि दक्षिण भारत की कुछ पार्टियां, डीएमके और अन्य सहयोगी दल समर्थन देते हैं तो सरकार के लिए आवश्यक संख्या जुटाना आसान हो सकता है। साथ ही समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई।
PM मोदी की ताकत उनकी भाषण शैली, नीतियां और नेतृत्व क्षमता
कार्यक्रम के अंतिम हिस्से में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की लोकप्रियता से जुड़े एक सर्वे का उल्लेख किया गया। सर्वे के अनुसार, मोदी की सबसे बड़ी ताकत उनकी भाषण शैली, नीतियां और नेतृत्व क्षमता मानी गई, जबकि राहुल गांधी के बारे में लोगों ने उन्हें सबसे अधिक "सेक्युलर" और "दृढ़" नेता बताया। एक अन्य प्रश्न में राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के अलावा पसंदीदा नेता के रूप में अरविंद केजरीवाल का नाम सबसे अधिक सामने आने का दावा भी किया गया। इस पर पैनलिस्टों ने विपक्ष के नेतृत्व, संचार कौशल और राष्ट्रीय राजनीति में विकल्पों पर चर्चा की।
महिला आरक्षण-परिसीमन जैसे विधायी एजेंडे को प्राथमिकता दे रही सरकार
कुल मिलाकर कार्यक्रम में यह निष्कर्ष सामने रखा गया कि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े विधायी एजेंडे को प्राथमिकता दे रही है और विपक्ष के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रही है। वहीं, कांग्रेस संसद में गृह मंत्री के बयान और छात्र आंदोलनों के मुद्दे पर अपना दबाव बनाए रखना चाहती है। चर्चा में दोनों पक्षों की रणनीतियों, संसद के संभावित विशेष सत्र और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों को प्रमुख विषय के रूप में प्रस्तुत किया गया। Coffee Par Kurukshetra में इससे पहले यूपी के चुनाव में क्या होगी BJP की रणनीति, क्या राम मंदिर जैसे मुद्दे बनेंगे मुसीबत, इसको लेकर चर्चा हुई थी।
(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)
