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क्या कहता है यूपी और अन्य राज्यों का सर्वे? Coffee Par Kurukshetra में हुई चर्चा

इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो Coffee Par Kurukshetra में यूपी और अन्य राज्यों के सर्वे पर विस्तृत चर्चा हुई। सर्वे में 25 फीसदी लोगों ने कहा कि वे वोट देते समय पार्टी की विचारधारा को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं।

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सामने रखे गए एक सर्वे के आंकड़ों पर इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो Coffee Par Kurukshetra में चर्चा हुई। इस चर्चा में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा, पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर के साथ-साथ गेस्ट के रूप में प्रदीप सिंह और मनोज कुमार सिंह मौजूद रहे।

यूपी के सर्वे के मुताबिक, 52 फीसदी लोग राज्य सरकार के प्रदर्शन से पूर्णतः संतुष्ट, संतुष्ट या औसत रूप से संतुष्ट बताए गए। वहीं विधायकों से संतुष्टि इन श्रेणियों को मिलाकर करीब 44 फीसदी रही। लोगों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी बताया गया, जिसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई का नंबर रहा।

वोट देते समय पार्टी की विचारधारा सबसे अहम

सर्वे में 25 फीसदी लोगों ने कहा कि वे वोट देते समय पार्टी की विचारधारा को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। मुख्यमंत्री के चेहरे को महत्व देने वालों की संख्या 13.5 फीसदी रही, जबकि विकास और जनहित के मुद्दे 22 फीसदी लोगों के लिए प्रमुख रहे। 64 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने अपना वोट तय कर लिया है, जबकि करीब 36 फीसदी अभी अंतिम निर्णय नहीं ले पाए हैं या अपनी राय स्पष्ट नहीं कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री की पसंद के सवाल पर योगी आदित्यनाथ को 43.4 फीसदी और अखिलेश यादव को 35.5 फीसदी समर्थन मिला। वहीं पार्टी या गठबंधन के स्तर पर भाजपा को 41.8 फीसदी और सपा को 38.7 फीसदी समर्थन बताया गया। यानी दोनों के बीच करीब 3 फीसदी का अंतर सामने आया। कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा हुई कि 2017 में यह अंतर करीब 13 फीसदी और 2022 में करीब 7 फीसदी था।

हालांकि, कार्यक्रम में मौजूद एक सर्वे विशेषज्ञ ने ट्रैकर सर्वे के आधार पर सीधे वोट प्रतिशत का अनुमान लगाने को कठिन बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज को मापने के लिए अलग-अलग सवालों और तरीकों की जरूरत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले व्यक्ति को स्वाभाविक रूप से एक एडवांटेज मिलता है।

कानून-व्यवस्था और विकास को BJP की बढ़त का आधार बताया

वहीं दूसरे मेहमान ने यूपी में भाजपा की बढ़त का आधार कानून-व्यवस्था, महिलाओं में सुरक्षा की भावना, सरकारी नौकरियों और इंफ्रास्ट्रक्चर को बताया। चर्चा में दावा किया गया कि राज्य में नियुक्तियों, उद्योगों, एयरपोर्ट और मेडिकल कॉलेज जैसे विकास कार्यों का असर चुनाव पर पड़ सकता है।

युवा वोटरों को लेकर भी अलग राय सामने आई। सर्वे में 18 से 24 वर्ष के बीच के युवाओं में अखिलेश यादव को योगी आदित्यनाथ से अधिक पसंद किए जाने का आंकड़ा सामने रखा गया, जिस पर एक मेहमान ने सर्वे को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया।

उत्तराखंड में सर्वे ने भाजपा को 41 फीसदी और कांग्रेस को 36 फीसदी समर्थन बताया। मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी को करीब 28 फीसदी समर्थन मिला। कार्यक्रम में माना गया कि राज्य में भाजपा आगे है, लेकिन मुख्यमंत्री की लोकप्रियता का आंकड़ा अपेक्षा से कम होने पर सवाल भी उठे।

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार की अप्रूवल रेटिंग 55 फीसदी बताई गई। पार्टी को 34 फीसदी और कांग्रेस को 30 फीसदी समर्थन का अनुमान सामने आया। चर्चा में कहा गया कि भाजपा-अकाली दल गठबंधन की संभावनाओं पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

कार्यक्रम का निष्कर्ष यही रहा कि सर्वे के आंकड़े चुनावी तस्वीर का केवल एक संकेत हैं। वास्तविक चुनावी नतीजे वोट प्रतिशत के साथ-साथ सीटों, सामाजिक समीकरणों, उम्मीदवारों और अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के प्रदर्शन पर निर्भर करेंगे।

डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिये गये वीडियो पर क्लिक करें।

(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)

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