मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के पहले ही दिन धर्मेंद्र प्रधान ने पार्टी अध्यक्ष के सामने इस्तीफे की पेशकश कर दी थी, लेकिन उस समय नेतृत्व ने उन्हें मना कर दिया था। विजयवर्गीय के अनुसार, जब CJP का आंदोलन शुरू हुआ था, तब धर्मेंद्र प्रधान ने संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पार्टी अध्यक्ष से कहा था कि अगर आपको लगता है तो मैं तुरंत इस्तीफा दे देता हूं। हालांकि, उस समय भाजपा नेतृत्व ने उन्हें इस्तीफा देने से मना कर दिया था। लेकिन बाद में परिस्थितियां बदलने पर पार्टी ने फैसला लिया और प्रधान ने तुरंत इस्तीफा दे दिया।
विदेशी ताकतों के मंसूबे हुए पस्त
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से विदेशी ताकतों को जो देश में बांग्लादेश श्रीलंका की तरह हिंसा करना चाहती थी उनके मंसूबे खत्म हो गए। उन्होंने कहा, 'जो विदेशी ताकते भारत में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसा माहौल बनाना चाहती थीं और हिंसा भड़काना चाहती थीं, धर्मेंद्र जी के इस्तीफे से उनके सारे इरादे खत्म हो गए। देश में अराजकता, अस्थिरता पैदा की साजिश नाकाम हो गई है।' विजयवर्गीय ने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान जी ने जो काम किया है मैं उनके लिए बधाई देता हूं। उन सबके मंसूबे खत्म दिए जो विदेशी ताकते यहां पर विदेशी ताकते यहां पर अस्थिरता पैदा करना चाह रहे थे।
कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी की भूमिका दूसरों के आंदोलनों का श्रेय लेने तक सीमित रह गई है। बच्चों ने आंदोलन किया वह उसके पीछे खड़े हो गए। तंज कसते हुए विजयवर्गीय ने कहा 'कांग्रेस का हाल ऐसा है कि पड़ोसी के घर बच्चा हो तो ये ढोलक बजाने पहुंच जाते हैं। बंगाल चुनाव के बाद कांग्रेस पूरी तरह निराश हो चुकी थी। ऐसे में उन्हें CJP के रूप में एक आशा की किरण दिखी और उनके पीछे जाकर खड़े हो गए' उन्होंने आगे कहा, 'कांग्रेसियों की नीति यही रही कि तुम लट्ठ खाओ, हम तुम्हारे पीछे खड़े हैं'। क्या एक भी कांग्रेसी ने लाठी खाई है? और अब वे जश्न मना रहे हैं।'
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