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'RLJP अब NDA का हिस्सा नहीं है', पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस का ऐलान

पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने बड़ा ऐलान करते हुए NDA से नाता तोड़ लिया है। पशुपति पारस ने कहा है कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी यानी RLJP अब NDA का हिस्सा नहीं है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस।- India TV Hindi
Image Source : PTI पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने सोमवार को बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अब उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) अब भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा नहीं है। पशुपति कुमार पारस ने अपने इस फैसले का कारण भी बताया है। उन्होंने कहा है कि एनडीए ने उनके भतीजे और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान का साथ देने का फैसला किया है। आइए जानते हैं कि पारस ने इस बारे में और क्या कुछ कहा है।

एनडीए के साथ कोई संबंध नहीं- पारस

दरअसल, पशुपति कुमार पारस ने सोमवार को बीआर आंबेडकर की जयंती के मौके पर पटना में रालोजपा के कार्यक्रम को संबोधित किया। इसी कार्यक्रम में उन्होंने एनडीए से अलग होने का ऐलान किया है। पशुपति पारस ने इस दौरान कहा कि वह साल 2014 से एनडीए के साथ रहे हैं कि लेकिन आज वह ऐलान करते हैं कि उनकी पार्टी रालोजपा का एनडीए के साथ कोई संबंध नहीं होगा।

रामविलास को भारत रत्न देने की मांग

 

पशुपति पारस ने रामविलास पासवान को दूसरा आंबेडकर बताया और उनके लिए भारत रत्न की मांग की है। आपको बता दें कि पशुपति कुमार पारस ने अपने दिवंगत भाई रामविलास पासवान द्वारा स्थापित की गई राजनीतिक पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP/लोजपा) से बगावत कर दी थी। उन्होंने इसके बाद साल 2021 में रालोजपा की स्थापना की थी। वहीं, उनके भतीजे और रामविलास के बेटे चिराग पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की स्थापना की थी। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास को एनडीए ने 5 सीटें दी थीं। वहीं, पारस की पार्टी को एक भी सीट नहीं दी गई। इसी के बाद पारस ने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, चुनाव में सभी 5 सीटों पर चिराग की पार्टी की जीत हुई थी।

पशुपति कुमार पारस ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर दलित विरोधी होने का भी आरोप लगाया है। पारस ने कहा कि उन्होंने बिहार के 38 में से 22 जिलों का दौरा किया है और उन्हें एहसास हुआ है कि बिहार एक नई सरकार चाहता है। पारस ने आरोप लगाया कि सीएम नीतीश के 20 साल के शासनकाल में बिहार की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। यहां कोई भी उद्योग स्थापित नहीं हुआ है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि बिहार में भ्रष्टाचार के कारण कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। पारस ने ये भी कहा है कि वह बिहार की सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं।(इनपुट: भाषा)

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