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'क्या देशभक्त होना इतना मुश्किल है?', मलेशिया में सलमान खुर्शीद का छलका दर्द; जानें क्यों कह दी इतनी बड़ी बात

कांग्रेस सांसद सलमान खुर्शीद इन दिनों भारतीय सांसदों के डेलिगेशन के साथ मलेशिया पहुंचे हैं। यहां उन्होंने कहा कि "क्या देशभक्त होना इतना मुश्किल हैं? जब मैं यह कहता हूं तो यह सवाल उन लोगों से पूछना चाहिए जो ट्वीट कर रहे हैं और सिर्फ ऐसी बातें कह रहे हैं।"

सांसदों के डेलिगेशन के साथ मलेशिया पहुंचे सलमान खुर्शीद।- India TV Hindi
Image Source : ANI सांसदों के डेलिगेशन के साथ मलेशिया पहुंचे सलमान खुर्शीद।

जदयू सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य इस समय मलेशिया में हैं। यहां कुआलालंपुर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने मलेशियाई भारतीय कांग्रेस (MIC) के प्रतिनिधियों से मुलाकात की, जिसका नेतृत्व मलेशियाई सीनेट के पूर्व अध्यक्ष और एमआईसी के अध्यक्ष तन श्री विग्नेश्वरन ने किया। इस मौके पर कांग्रेस सांसद सलमान खुशीद ने कहा लोग सवाल करते हैं कि आप वहां पर क्या कर रहे हैं, जहां बीजेपी के लोग हैं? मैं यहां वही कर रहा हूं तो देश के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि "जब मैं कहता हूं कि क्या देशभक्त होना इतना मुश्किल है? तो यह सवाल उन लोगों से पूछा जाना चाहिए जो ट्वीट कर रहे हैं और सिर्फ ऐसी बातें कह रहे हैं"

बीजेपी के लोगों के साथ क्या कर रहे हैं खुर्शीद?

सलमान खुर्शीद ने इस मौके पर कहा, "लोग कहते रहते हैं 'आप ऐसे प्रतिनिधिमंडल में क्या कर रहे हैं जिसमें भाजपा के लोग हैं, आप वहां क्या कर रहे हैं?' हम यहां क्या कर रहे हैं? हम यहां वही कर रहे हैं जो देश के लिए जरूरी है। चाहे आप किसी भी पार्टी से हों, आज देश के पक्ष में बोलने के लिए एक आवाज की जरूरत है और हम यहां वही कर रहे हैं। मुझे लगता है कि जब मैं कहता हूं कि क्या देशभक्त होना इतना मुश्किल है? तो यह सवाल उन लोगों से पूछा जाना चाहिए जो ट्वीट कर रहे हैं और ऐसी बातें कह रहे हैं, जो मुझे लगता है कि देश के लिए कुछ करने के लिए बहुत उत्साहजनक नहीं हैं।"

सभी लोग एकमत और उत्साहित हैं

कांग्रेस सांसद सलमान खुशीद ने आगे कहा, "कुल मिलाकर प्रतिक्रियाएं और जवाब बहुत अच्छे रहे हैं। बेशक, हम यहां कई राजनीतिक दलों से मिल रहे हैं और उनमें से कई सरकार का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन वे अलग-अलग राजनीतिक दल हैं और प्रत्येक राजनीतिक दल का एक विशेष संदर्भ बिंदु या एक विशेष बारीकियां होती हैं जो अलग-अलग हो सकती हैं। लेकिन जिन मुद्दों को लेकर हम यहां आए हैं, उन पर उनकी पूरी सहमति है, जो आतंकवाद का विरोध करना है। यह इतने लंबे समय से हमें इतनी बुरी तरह से नुकसान पहुंचा रहा है, इस पर सभी लोग पूरी तरह से एकमत है और हम इससे बहुत उत्साहित हैं।"

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