‘दुनिया को मत्स्य न्याय से बचाने की जरूरत’, पीएम मोदी ने बताया क्या है भारत का विजन
पीएम नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में ‘मत्स्य न्याय’ का जिक्र कर ताकतवर देशों के कमजोर देशों पर हावी होने से बचने की जरूरत बताई। उन्होंने तकनीक, निर्यात, डिजिटल भुगतान, ऊर्जा, रोजगार और महिला सशक्तीकरण में भारत की प्रगति गिनाई।

Highlights
- पीएम मोदी ने कहा, दुनिया को ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां ताकतवर देश कमजोर देशों पर हावी न हों।
- भारत चिप डिजाइन, डिजिटल भुगतान, AI, स्टार्टअप और अनुसंधान में अपनी वैश्विक भूमिका मजबूत कर रहा है।
- प्रधानमंत्री ने ऊर्जा, रोजगार, महिला सशक्तीकरण और खेलों में भारत की उपलब्धियों का भी जिक्र किया।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दुनिया की बदलती परिस्थितियों और भारत की भूमिका पर बात की। NDTV ग्लोबल समिट में उन्होंने कहा कि आज दुनिया को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें ताकतवर देश कमजोर देशों पर अपनी मर्जी न थोपें। इसके लिए उन्होंने ‘मत्स्य न्याय’ की अवधारणा का जिक्र किया। इसका मतलब ऐसी स्थिति से है, जिसमें बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है, यानी ताकतवर कमजोर पर हावी हो जाता है। पीएम मोदी के मुताबिक, दुनिया को इस सोच से बचाने और सभी देशों को उचित स्थान देने की जरूरत है।
‘ग्लोबल साउथ’ को मिले उचित स्थान
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और फैसले लेने की व्यवस्थाओं में उसी गति से बदलाव नहीं आया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक संस्थाओं को आज की चुनौतियों के हिसाब से अधिक प्रभावी बनाना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को वैश्विक व्यवस्था में उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा,
'अंतरराष्ट्रीय सहयोग सिर्फ अच्छे समय में काम आने वाला नहीं होना चाहिए, बल्कि संकट के समय भी प्रभावी रहना चाहिए। भारत की कोशिश है कि दुनिया की समस्याओं के समाधान में सभी देशों की भागीदारी हो और किसी एक देश की ताकत ही फैसलों का आधार न बने।'
‘दुनिया के लिए बैक ऑफिस नहीं, ब्रेन ऑफिस बन रहा भारत’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल दुनिया के लिए सेवाएं देने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि नई सोच, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने भारत की इस बदलती भूमिका को ‘बैक ऑफिस’ से ‘ब्रेन ऑफिस’ बनने की दिशा में बढ़ता कदम बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में दुनिया के चिप-डिजाइन से जुड़े कार्यबल का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा काम करता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय छात्रों ने 325 से ज्यादा चिप डिजाइन तैयार किए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तकनीकी क्षमता और प्रतिभा के दम पर वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
निर्यात, डिजिटल भुगतान और स्टार्टअप में भारत की प्रगति
पीएम मोदी ने भारत की आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि सितंबर में देश के निर्यात में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। उन्होंने बताया कि दुनिया के आधे से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भारत में हैं। ये ऐसे केंद्र हैं, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां तकनीक, अनुसंधान और दूसरी महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े काम करती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि रियल टाइम डिजिटल भुगतान के मामले में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी भारत दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। उन्होंने इन उपलब्धियों को देश की तकनीकी क्षमता और तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल ढांचे का संकेत बताया।
रिसर्च, पेटेंट और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बढ़ती ताकत
प्रधानमंत्री ने अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारत की प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में एक साल में 1.5 लाख से ज्यादा पेटेंट दाखिल किए गए। उन्होंने भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करना होगा। उन्होंने कहा,
'देश अब केवल बड़े स्तर पर प्रतिभा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े स्तर पर सोचने और नई तकनीक विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।'
पेनिसिलिन-G उत्पादन से आत्मनिर्भरता तक
प्रधानमंत्री मोदी ने दवा उद्योग में भारत की प्रगति का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में पेनिसिलिन-G का घरेलू उत्पादन फिर से शुरू हुआ है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भारत ने 100 से ज्यादा देशों को दवाएं भेजीं। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए बताया कि भारत संकट के समय भी दूसरे देशों की मदद करने की क्षमता रखता है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता केवल अपने लिए जरूरी चीजें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलती है।
ऊर्जा और स्वच्छ तकनीक में भी आगे बढ़ रहा भारत
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है। गैर-जीवाश्म ऊर्जा में सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा जैसे स्रोत शामिल होते हैं, जो पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं। उन्होंने देश में हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल करने का भी जिक्र किया। क्रिटिकलिटी का अर्थ है कि परमाणु रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया अपने आप जारी रहने की स्थिति में पहुंच गई है। पीएम मोदी ने इन उपलब्धियों को विज्ञान, ऊर्जा और तकनीक में भारत की बढ़ती क्षमता से जोड़ा।
खेलों में भी भारत की उपलब्धियों का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने खेलों में भारत के प्रदर्शन की चर्चा करते हुए एशियन गेम्स में 85 पदक जीतने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने कई ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जो पहले देश के नाम नहीं थीं। पीएम मोदी ने बताया कि बॉक्सिंग में भारत ने एक ही एशियन गेम्स में पहली बार 3 स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने सिपक टकरॉ में भी भारत के पहली बार पदक जीतने का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों में ये उपलब्धियां देश में प्रतिभा और आत्मविश्वास के बढ़ने का संकेत हैं।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पर भी बोले
पीएम मोदी ने महिला सशक्तीकरण की चर्चा करते हुए बताया कि गांवों में 3.5 करोड़ से ज्यादा महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को 6 करोड़ तक पहुंचाना है। ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत महिलाओं को ऐसी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जाता है, जिनसे उनकी सालाना आय एक लाख रुपये या उससे अधिक हो सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश में 70 लाख नई नौकरियां पैदा हुईं और विकसित भारत रोजगार योजना के जरिए रोजगार को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
मध्यम वर्ग और बिजली व्यवस्था में बदलाव
प्रधानमंत्री ने मध्यम वर्ग को राहत देने वाली कर व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 12 लाख रुपये तक की आय पर कर शून्य होने से लोगों को राहत मिली है। यह बात उन्होंने देश में हो रहे आर्थिक बदलावों और आम लोगों की आर्थिक स्थिति के संदर्भ में कही। पीएम मोदी ने बिजली की बढ़ती मांग के बावजूद देश के बिजली ग्रिड के बेहतर प्रबंधन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले बिजली की मांग बढ़ने पर ग्रिड के ठप होने की आशंका रहती थी, लेकिन अब व्यवस्था में सुधार हुआ है।
भारत की प्रगति से दुनिया को भी फायदा
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्रगति केवल भारतीयों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूती दे सकता है और संकट के समय दूसरे देशों की मदद कर सकता है। पीएम मोदी ने विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर देते हुए कहा कि भारत को हर चुनौती को अवसर में बदलना होगा। उन्होंने वैश्विक सहयोग, तकनीक, अनुसंधान, ऊर्जा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी को देश की आगे की यात्रा के अहम हिस्से के रूप में पेश किया।
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