नई दिल्ली: देश आज भारतीय सेना के वीर इन्फैंट्री जवानों के साहस और बलिदान को याद कर रहा है। शौर्य दिवस के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पैदल सेना के जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए सैनिकों ने अदम्य साहस दिखाया है और उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी सेना के जवानों को नमन करते हुए देश की सीमाओं और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में उनके योगदान को सराहा।
'जवानों के बलिदान को देश हमेशा याद रखेगा'
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर भारतीय सेना के इन्फैंट्री जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि शौर्य दिवस पर वह सेना के बहादुर पैदल सैनिकों के असाधारण साहस, वीरता और बलिदान को सलाम करते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि 1947 के ऐतिहासिक युद्धक्षेत्रों से लेकर आज की चुनौतीपूर्ण सीमाओं तक, इन जवानों ने हर मुश्किल परिस्थिति में मजबूती से मोर्चा संभाला है। उन्होंने कहा,
'जब देश को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वे डटे रहे और भारत का सिर ऊंचा रखने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। कर्तव्य के प्रति जवानों का अटूट समर्पण, अद्भुत साहस और देश के लिए जान देने का जज्बा भारतीय सशस्त्र बलों की बेहतरीन परंपराओं को दर्शाता है। देश को अपनी पैदल सेना पर गर्व है और राष्ट्र उनकी सेवा तथा बलिदान के लिए हमेशा आभारी रहेगा।'
किशन रेड्डी ने भी जवानों के शौर्य को किया नमन
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी भारतीय सेना के पैदल सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने 80वें इन्फैंट्री दिवस यानी शौर्य दिवस के अवसर पर जवानों के साहस, वीरता और देश की सेवा में दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद किया। रेड्डी ने X पर अपने संदेश में कहा कि भारतीय सेना ने हर कठिन परिस्थिति में मजबूती से मुकाबला किया है। उन्होंने कहा,
'सेना ने देश की सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। देश पैदल सेना के जवानों की निस्वार्थ सेवा को सलाम करता है और ड्यूटी निभाते हुए उनके दिए गए बलिदान का सम्मान करता है।'
27 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है शौर्य दिवस?
भारत में हर साल 27 अक्टूबर को इन्फैंट्री दिवस यानी शौर्य दिवस मनाया जाता है। इस दिन का देश के इतिहास में विशेष महत्व है। 27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना के पैदल सैनिक सबसे पहले श्रीनगर एयरपोर्ट पर उतरे थे। उस समय पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला किया था। भारतीय सेना के जवानों ने अदम्य साहस के साथ उनका मुकाबला किया और इस आक्रमण को पीछे धकेलने में अहम भूमिका निभाई। उनके अभियान ने भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। शौर्य दिवस उन सैनिकों की वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और देश की संप्रभुता की रक्षा के प्रति उनके अटूट समर्पण की याद दिलाता है। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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