यूपी-बिहार MLC चुनाव में बूथ कैप्चरिंग, मारपीट और बैलेट लूटने के आरोप; अखिलेश-तेजस्वी ने उठाए सवाल
यूपी और बिहार के MLC चुनाव में बूथ कैप्चरिंग, फर्जी मतदान और मारपीट के आरोपों से सियासी घमासान मचा है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि बीजेपी ने आरोपों को खारिज किया।

Highlights
- यूपी-बिहार MLC चुनाव में कई जगह हंगामा, मारपीट और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगे।
- अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए, जबकि बीजेपी नेताओं ने आरोपों को खारिज किया।
- बिहार में भी झड़पें हुईं, तेजस्वी यादव ने सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और बिहार में शुक्रवार को MLC चुनाव के दौरान कई जगहों पर हंगामा, मारपीट और कथित बूथ कैप्चरिंग की शिकायतें सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, आगरा, वाराणसी और कौशांबी में अलग-अलग घटनाओं को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। बिहार में भी बीजेपी, जनसुराज और जेडीयू समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
बैलेट पेपर से मतदान, फिर बूथ पर बवाल क्यों?
MLC चुनाव में मतपत्र के जरिए मतदान होता है। इसमें आम चुनावों की तरह सभी मतदाता वोट नहीं डालते, बल्कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के निर्धारित मतदाता मतदान करते हैं। इस बार उत्तर प्रदेश और बिहार से बूथ पर कब्जे, फर्जी मतदान और मतपत्रों के कथित दुरुपयोग की शिकायतें आईं। मतदान के दौरान कई जगह राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें भी हुईं। इन घटनाओं ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने और मतदान केंद्रों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी।
फतेहपुर में बैलेट पेपर का बंडल लेकर फर्जी वोटिंग!
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में खागा विधानसभा क्षेत्र के विजयीपुर ब्लॉक स्थित एक मतदान केंद्र पर हंगामा हुआ। एक मतदाता ने आरोप लगाया कि जब वह वोट डालने पहुंचा, तो कुछ लोग बूथ के अंदर आए और गेट बंद कर दिए। आरोप के मुताबिक, उन्होंने चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को धमकाया और सीसीटीवी कैमरे बंद करा दिए। इसके बाद बैलेट पेपर का बड़ा बंडल लेकर कथित तौर पर फर्जी मतदान किया गया। मतदाता के बाहर आकर शिकायत करने के बाद बीजेपी और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भिड़ गए। मारपीट और धक्का-मुक्की की सूचना पर पुलिस, एसपी और डीएम मौके पर पहुंचे।
पुलिस ने बूथ कैप्चरिंग के आरोपों से किया इनकार
फतेहपुर में हंगामे के बाद अधिकारियों के सामने बूथ कैप्चरिंग की शिकायत रखी गई। हालांकि, पुलिस अधीक्षक ने बूथ पर कब्जे की घटना से इनकार किया। उनके मुताबिक, वहां बूथ कैप्चरिंग नहीं हुई थी, बल्कि बीजेपी और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच आपसी विवाद हुआ था, जिसे सुलझा लिया गया। इस तरह एक तरफ मतदाता की ओर से फर्जी मतदान और कैमरे बंद कराने के आरोप लगाए गए, जबकि पुलिस ने बूथ लूटने की बात को गलत बताया।
मुजफ्फरनगर में कार्ड पर भिड़े बीजेपी-सपा कार्यकर्ता
मुजफ्फरनगर ग्रेजुएट सीट पर डीएवी डिग्री कॉलेज में बीजेपी और सपा के कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट हुई। यूपी सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने आरोप लगाया कि सपा के उम्मीदवार के नाम वाले कार्ड के साथ कुछ ऐसे लोग पोलिंग एजेंट बनकर बूथ में घुस गए, जो अधिकृत नहीं थे। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ता मतदान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे और इसी दौरान उन्हें पकड़कर कार्ड छीन लिया गया। दूसरी ओर, सपा के जिलाध्यक्ष जिया चौधरी ने आरोप लगाया कि अग्रवाल खुद पोलिंग एजेंट न होने के बावजूद बूथ में घुस गए थे। उन्होंने बूथ के अंदर प्रचार करने और मतदाताओं को धमकाने का भी आरोप लगाया।
गोरखपुर में सपा उम्मीदवार को बूथ से दूर जाने को कहा
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर भी बीजेपी और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई और मारपीट की नौबत आ गई। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार संजय त्रिपाठी वोट डालने के लिए डीएवी पीजी कॉलेज पहुंचे थे। मतदान के बाद वह बूथ के पास ही मीडिया से बातचीत करने लगे। इसी दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनसे बूथ से दूर जाने को कहा, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए।
आगरा में सपा उम्मीदवार रोते हुए मंडल आयुक्त के दफ्तर पहुंचे
आगरा शिक्षक सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आकाश अग्रवाल ने भी बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए। वह अपनी शिकायत लेकर मंडल आयुक्त के कार्यालय पहुंचे और वहां बाहर रोने लगे। आकाश अग्रवाल ने दावा किया कि उनकी सीट पर कई जगह बूथ लूटे गए हैं और उनके पास इसके सबूत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और चुनाव आयोग बूथ कैप्चरिंग रोकने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव प्रक्रिया के दौरान ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो वह न्याय के लिए कहां जाएं।
वाराणसी में आचार संहिता उल्लंघन पर विवाद
वाराणसी में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप लगे। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मतदान केंद्र के पास उनकी मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए नियम तोड़ने का आरोप लगाया। इसके बाद बीजेपी और सपा कार्यकर्ताओं के बीच बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हंगामे में बदल गई। इस घटना को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ।
कौशांबी में निजी गाड़ियों की एंट्री पर भिड़े नेता
कौशांबी के नेवादा ब्लॉक में भी मतदान के दौरान हंगामा हुआ। बीजेपी जिलाध्यक्ष धर्मराज मौर्य ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बूथ कैप्चरिंग की कोशिश कर रहे थे और पुलिस उनका साथ दे रही थी। विवाद तब बढ़ा, जब मतदान केंद्र के अंदर दो गाड़ियों को प्रवेश दिए जाने की जानकारी सामने आई। धर्मराज मौर्य ने कहा कि निजी गाड़ियों को बूथ के भीतर जाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। वह मौके पर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से भिड़ गए। उन्होंने सपा नेताओं पर गुंडागर्दी करने और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को पोलिंग एजेंट बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह पुलिस अधिकारियों की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से करेंगे।
सपा उम्मीदवार ने लगाया फर्जी वोटिंग का आरोप
कौशांबी से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मान सिंह यादव भी विवाद के बीच मौके पर पहुंचे। उन्होंने बीजेपी पर मतदाताओं को धमकाने और अलग-अलग मतदान केंद्रों पर फर्जी वोटिंग की कोशिश करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, सपा कार्यकर्ताओं ने ऐसी कोशिशों को पकड़ लिया, जिसके बाद बीजेपी नेता नाराज हो गए। दूसरी तरफ, बीजेपी जिलाध्यक्ष धर्मराज मौर्य ने सपा कार्यकर्ताओं पर बूथ कैप्चरिंग की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव के दौरान कथित धांधली को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सपा की ओर से आयोग को 30 से अधिक शिकायतें भेजी गईं। अखिलेश ने X पर कई वीडियो साझा किए और बीजेपी पर बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा,
'इलेक्शन के टाइम पर चुनाव आयोग नींद की गोली ले कर सो गया है। वोटर्स को वोट नहीं डालने दिया जा रहा है।'
उनके आरोपों के बीच मतदान केंद्रों पर हुई घटनाओं को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया।
'अखिलेश पहले तय करें, EVM खराब है या बैलेट पेपर'
अखिलेश यादव के आरोपों पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश को पहले यह तय करना चाहिए कि उनके मुताबिक EVM खराब है या बैलेट पेपर। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश चुनाव हारने के बाद हर बार हार का नया बहाना लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बातों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। वहीं, बीजेपी के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश के आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में बूथ कैप्चरिंग हुई होती, तो मतदाता भी शिकायत करते। उनके मुताबिक, केवल अखिलेश ही वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं।
बिहार में भी बीजेपी, जनसुराज और जेडीयू समर्थकों के बीच झड़प
बिहार में भी MLC चुनाव के दौरान कई जगहों पर हंगामा हुआ। कोसी ग्रेजुएट सीट पर जनसुराज और बीजेपी नेताओं के बीच मारपीट की घटना सामने आई। लखीसराय में बीजेपी जिलाध्यक्ष दीपक सिंह और जनसुराज नेता सूरज कुमार के बीच विवाद हुआ, जो मारपीट तक पहुंच गया। वहीं, मोकामा में मतदान शुरू होने से पहले जेडीयू और जनसुराज समर्थक आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच झड़प के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और तीन लोगों को हिरासत में लिया। मोकामा में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने अनंत सिंह के समर्थक छोटू सिंह को भी हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के बाद वहां भी हंगामा हुआ। बिहार में मतदान के दौरान हुई इन घटनाओं ने चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।
'चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल'
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बिहार में चुनाव प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार उनके नेताओं को डरा रही है। तेजस्वी के मुताबिक, रात में आरजेडी उम्मीदवार डॉक्टर संजीव के घर पुलिस भेजी गई। उन्होंने इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगाई और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि इससे चुनाव के नतीजे नहीं बदलेंगे।
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