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Hindi News भारत उत्तर प्रदेश अखिलेश का योगी सरकार पर तंज- 'जिसकी जैसी समझ, उसका वैसा बजट'

अखिलेश का योगी सरकार पर तंज- 'जिसकी जैसी समझ, उसका वैसा बजट'

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को पेश बजट को 'सबका साथ, सबका विकास' के नाम पर धोखा करार दिया है।

<p>akhilesh yadav</p>- India TV Hindi akhilesh yadav

लखनऊ: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को पेश बजट को 'सबका साथ, सबका विकास' के नाम पर धोखा करार दिया है। अखिलेश ने प्रदेश विधानसभा में वित्त वर्ष 2019—20 के लिए पेश बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए संवाददाताओं से कहा कि इस बजट में ना तो विकास है और ना ही 'विजन'। और ना ही यह सामाजिक न्याय की तरफ जाता दिख रहा है। यह सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के नाम पर सबको धोखा दे रही है।

उन्होंने कहा कि अब तक जनता के सामने इस सरकार के 60 प्रतिशत बजट आ चुके हैं। सरकार चलाने वाले सन्यासी हैं, योगी हैं, वह कम समझेंगे। ‘‘बजट में ना तो राजकोष के लिए और ना ही धर्मकोष के लिए कुछ दिखायी दे रहा है। जैसी जिसकी समझ, वैसा उसका बजट।’’ योगी सरकार के बजट के आकलन पर अखिलेश कहते हैं, ‘‘इस बजट को मेरी तरफ से शायद ही कुछ नम्बर मिलें।’’

अखिलेश ने कहा कि बजट में कुछ भी नया नहीं है, जो था वह भी खो दिया। बजट में किसानों और व्यापारियों के लिए कुछ नहीं है, बेरोजगारी के खात्मे के लिए कुछ नहीं है। ना ही स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के लिए कोई बजट है। यह बजट धोखा देने वाला निकला। उन्होंने दावा किया कि जितना काम सपा सरकार ने अयोध्या, काशी और मथुरा में किया है, उसका आधा बजट भी योगी सरकार नहीं दे पाई है। जो काम सपा सरकार में हुआ, उसे आगे नहीं बढ़ा पाई। अब चुनाव आ गया है तो कुछ बजट दे दिया।

अखिलेश ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों के लिए कोई प्रावधान नहीं है। शिक्षा के लिए कुछ नया नहीं। कोई नया सैनिक स्कूल नहीं खुलने जा रहा है। एक्सप्रेसवे के लिए जो धन दिया गया है, वह ऊंट के मुंह में जीरा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल लखनऊ में हुई इन्वेस्टर्स समिट में सौर ऊर्जा क्षेत्र में सबसे ज्यादा निवेश की बात कही थी लेकिन उसने बजट में इसके लिए धन ही नहीं दिया है। इसके अलावा 'मेक इन इंडिया' भी कैसे बनेगा, जब इसके लिए कोई बजट ही नहीं दिया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी गौमाता को बचाने के लिए बजट भाषण में कई जगह धन के आवंटन की बात कही गई है लेकिन औसत लगाएं तो हर गांव को इसके लिए सिर्फ 42 हजार रुपये मिलेंगे। क्या इतने भर से गौसेवा हो जाएगी?

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