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यूपी: कोरोनावयरस की दहशत से मंदिर में लगा ताला, अनिश्चितकाल के लिए रोका गया प्रवेश

बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी वाले बौद्ध तीर्थ श्रावस्ती में कोरोनावायरस संक्रमण की दहशत से डेन महामंकोल मंदिर पर ताला लगा दिया गया है।

Coronavirus Temples, Coronavirus Buddhists Temples, Coronavirus Shrawasti- India TV Hindi यूपी: कोरोनावयरस की दहशत से मंदिर में लगा ताला, अनिश्चितकाल के लिए रोका गया प्रवेश | Pixabay Representational

बहराइच/श्रावस्ती: बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी वाले बौद्ध तीर्थ श्रावस्ती में कोरोनावायरस संक्रमण की दहशत से डेन महामंकोल मंदिर पर ताला लगा दिया गया है। मंदिर प्रशासन ने मुख्य द्वार पर नोटिस बोर्ड लगाते हुए गेट पर ताला लगाकर देशी-विदेशी पर्यटकों का प्रवेश अनिश्चित काल के लिए रोक दिया है। नोटिस बोर्ड पर लिखा है कि कोरोनावायरस के संक्रमण को देखते हुए मंदिर को अनिश्चित समय के लिए बंद कर दिया गया है। हालात में सुधार के बाद मंदिर को फिर खोल दिया जाएगा।

एहतियातन बंद किया गया मंदिर
उपजिलाधिकारी राजेश मिश्र ने बताया, ‘बौद्ध स्थली श्रावस्ती में डेन महामंकोल एक विदेशी संस्था द्वारा बनवाया हुआ मंदिर है। एहतियातन उन्होंने मंदिर को बंद किया है क्योंकि श्रावस्ती में बहुत बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं।’ जिले में अभी कोरोनावायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया है फिर भी एहतियातन मंदिर को बंद किया गया है। उधर, बहराइच में नेपाल के रास्ते चीन से लौटे MBBS छात्रों को होम आइसोलेशन में रखने के निर्देश जिला प्रशासन ने दिए हैं। हाल ही में चीन से लौटे दो छात्रों को उनके घर में ही रहने को कहा गया है। स्वास्थ्य महकमे के लोग 12-12 घंटे पर दोनों छात्रों का परीक्षण करके उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट दे रहे हैं।

पर्यटकों की संख्या घटकर हुई आधी
कोरोनावायरस के संक्रमण से बचाव के लिए मठ मंदिरों और होटलों की निगरानी भी की जा रही है और एहतियात के तौर पर लोगों को मास्क लगाने की भी सलाह दी जा रही है। पर्यटन कारोबारियों के मुताबिक इन दिनों यहां विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी सबसे अधिक होती है, लेकिन इस बार उनकी संख्या घटकर आधे से भी कम रह गयी है। श्रावस्ती में बारिश के मौसम के बाद हर साल चीन, जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, कोरिया, म्यांमार सहित कई देशों के करीब दो लाख से अधिक बौद्ध भिक्षु व धर्मावलम्बी आते हैं। सर्दियों में अनेक मंदिरों में विशेष ध्यान सत्र चलाए जाते हैं। मंदिरों में बौद्ध भिक्षु और विदेशी धर्मावलंबी मौन व्रत रखकर विशेष पूजा करते हैं।

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