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सीएम उमर अब्दुल्ला का आरोप- ''बीजेपी कर रही पार्टी तोड़ने की कोशिश, विधायकों को दिए जा रहे प्रलोभन''

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी पर पार्टी तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनको विधायकों को 20-30 करोड़ रुपये और मंत्री बनाने का ऑफर दिया गया है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला- India TV Hindi
Image Source : ANI मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि उनकी पार्टी को तोड़ने की कोशिश की गई। विधायकों को 20 से 30 करोड़ का ऑफर और मंत्री  पद का प्रलोभन दिया जा रहा है। सीएम ने कहा कि उनके विधायकों ने ही बताया कि ऑफर में पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात भी कही गई।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पार्टी उनके विधायकों को लुभाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि बीजेपी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के वकील ने जम्मू के एक विधायक को बीजेपी में शामिल होने के लिए ₹20-30 करोड़ और मंत्री पद का प्रस्ताव दिया था, लेकिन पार्टी एकजुट रही और विधायक ने प्रस्ताव ठुकरा दिया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दिखाई ताकत

जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को होने वाले राज्य का दर्जा पाने के विरोध-प्रदर्शन से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस ने शनिवार को अपनी ताकत दिखाई। बेगम अकबर जहान की 26वीं पुण्यतिथि मनाने के लिए हज़ारों कार्यकर्ता और बड़े नेता इकट्ठा हुए। उमर और फारूक अब्दुल्ला ने भीड़ को संबोधित किया और केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि शांति बनी रहेगी या नहीं, यह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है। वे कोई गैर-कानूनी चीज़ नहीं मांग रहे हैं, बल्कि सिर्फ़ वे अधिकार मांग रहे हैं जिनका वादा किया गया था।

अब्दुल्ला बोले- हमारी धैर्य को कमजोरी ने समझें

उमर ने पुष्टि की कि जंतर-मंतर पर 20 जुलाई का कार्यक्रम होगा, हालांकि अभी तक इसकी अनुमति नहीं मिली है। इस आलोचना का जवाब देते हुए कि उन्होंने विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने से पहले दूसरों से सलाह नहीं ली, उमर ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) का मुद्दा नहीं था, बल्कि यह सभी से जुड़ा मुद्दा था, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों। राज्य का दर्जा पाने की लड़ाई सभी की लड़ाई थी। इसलिए, सभी मौजूदा और पूर्व विधायकों को विरोध-प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया गया था। उमर ने आगे कहा कि वे सिर्फ़ कुछ हासिल करने के लिए लद्दाख जैसा विरोध-प्रदर्शन नहीं करना चाहते थे। बल्कि उनका मकसद सरकार को उसके वादों की याद दिलाना था। यह देखते हुए कि सरकार को सत्ता में आए लगभग दो साल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि उन्होंने धैर्य दिखाया है, लेकिन इस संयम को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए और सरकार को उनके धैर्य की और परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने की अपील की और भरोसा जताया कि यह धैर्य आखिरकार उनकी जीत का कारण बनेगा।

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