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अधूरी रह गई हिज्बुल कमांडर की मां की आखिरी इच्छा, वीडियो जारी कर आतंकी से की थी ये अपील

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में हिज्बुल कमांडर रियाज अहमद की 80 साल की मां जन्ना बेगम का निधन हो गया। उसने अपने बेटे से बार-बार अपील की थी कि वह आतंकवाद छोड़कर सरेंडर करे, लेकिन उसकी आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो सकी।

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Image Source : PTI REPRESENTATIONAL हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों की एक तस्वीर।

किश्तवाड़/जम्मू: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में हिज्बुल मुजाहिदीन के एक कमांडर की 80 साल की बुजुर्ग मां का निधन हो गया। जन्ना बेगम नाम की यह महिला अपने हिज्बुल कमांडर बेटे से बार-बार सोशल मीडिया पर अपील करती थी कि वह हिंसा छोड़कर सरेंडर कर दे। जन्ना बेगम के आतंकी बेटे ने सरेंडर नहीं किया और इस तरह उसकी आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। मारवाह इलाके के अनियार गांव की रहने वाली जन्ना बेगम का 4 दिन पहले घर पर ही निधन हो गया। उसने पिछले साल नवंबर और दिसंबर में भावुक वीडियो जारी कर अपील की थी, जिसमें उसने अपने बेटे रियाज अहमद से घर लौटने और आतंकवाद का रास्ता छोड़ने की गुहार लगाई थी।

वीडियो में रियाज अहमद की मां ने क्या कहा था?

एक वीडियो में रिजाय अहमद की मां ने कहा था, 'उसे सरेंडर करके घर आ जाना चाहिए और हमारी देखभाल करनी चाहिए। कम से कम जब तक हम जिंदा हैं, तब तक वह यहां रहे और मेरे जनाजे का कंधा दे।' यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। एक करीबी रिश्तेदार ने बताया कि अपने बेटे की वापसी की राह देखते-देखते ही बेगम का निधन हो गया। रिश्तेदार ने कहा, 'उसकी आखिरी इच्छा अधूरी रह गई।' बता दें कि रियाज अहमद हिज्बुल मुजाहिदीन का 'ए-प्लस' कैटेगरी का कमांडर है, जिस पर सुरक्षाबलों द्वारा 10 लाख रुपये का इनाम रखा गया है।

15 साल पहले हिज्बुल में शामिल हुआ था रियाज

अधिकारियों के मुताबिक, रियाज करीब 15 साल पहले आतंकवादी संगठन में शामिल हुआ था। रियाज की मां ने आतंकवाद पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इससे माता-पिता को बुढ़ापे में बहुत तकलीफ होती है। उसने कहा था, 'यह कैसा जिहाद है जहां माता-पिता को अकेला छोड़ दिया जाता है? हम अकेले हैं। हमारी देखभाल कौन करेगा?' एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि परिजनों की तरफ से की गई ऐसी अपीलें बताती हैं कि आतंकवाद को लेकर लोगों का नजरिया बदल रहा है। अधिकारी ने कहा, 'आतंकवाद देश के लिए अच्छा नहीं है। बंदूक उठाने वाले या तो मारे जाते हैं या जेल जाते हैं। अगर वे अपने माता-पिता की बात मानकर सरेंडर कर दें तो अच्छा होगा।'