मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने के प्रस्ताव पर BJP विधायकों के जबरदस्त हंगामे के बीच, BJP MLA रंधावा को सदन से बाहर निकाला दिया गया। इसके बाद, जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कार्यवाही भी सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। ये हंगामा तब शुरू हुआ जब 30 मिनट के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई और BJP सदस्यों ने राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव में 26 जून, 2000 के विधानसभा के पुराने स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) प्रस्ताव का जिक्र किए जाने का कड़ा विरोध किया था।
मार्शलों ने BJP विधायक को सदन से निकाला
बता दें कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का समर्थन करते हुए भी, BJP विधायकों ने स्वायत्तता के मुद्दे को उठाने पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, जब हंगामा और बढ़ गया, तो BJP MLA रंधावा को मार्शलों ने सदन के किनारे से आगे बढ़ने और कुर्सी को अपने हाथों में उठाने की कोशिश करने पर बाहर निकाल दिया।
BJP विधायकों ने उमर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
विरोध-प्रदर्शन के दौरान, BJP सदस्यों ने "देश के टुकड़े हम नहीं सहेंगे" और "बिजली-पानी जो दे न सकी, वह सरकार निकम्मी है" जैसे नारे लगाए और कामकाज व बिजली के मुद्दों पर सरकार को घेरा। हंगामा जारी रहने और सामान्य कार्यवाही असंभव हो जाने के कारण, स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने विधानसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले भी, 21 सितंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने हंगामा हुआ था। धक्का-मुक्की भी हुई थी। इसका वीडियो भी सामने आया था।
उमर अब्दुल्ला ने एक बार फिर की पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग
गौरतलब है कि सीएम उमर अब्दुल्ला ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग की। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मैं चाहता हूं कि सदन राज्य का दर्जा देने के प्रस्ताव पर चर्चा करे। राज्य का दर्जा न होना हमारे लिए बहुत नुकसानदेह है। संसद और सुप्रीम कोर्ट में हमसे वादा किया गया था कि तीन चरणों वाली प्रक्रिया अपनाई जाएगी: परिसीमन, चुनाव और फिर राज्य का दर्जा। लोगों ने भारी संख्या में वोट दिया, यह सोचकर कि चुनाव के बाद यह वादा पूरा किया जाएगा।
भारत सरकार को लगातार याद करा रहे हैं वादा
उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा कि हम लगातार भारत सरकार को यह वादा याद दिलाते रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री ने कहा था, "यह मोदी का वादा है।" वे इस वादे को पूरा क्यों नहीं कर रहे हैं? हमने सोचा कि बाहर बोलने के बजाय सदन में इस पर चर्चा करना बेहतर होगा।
ये भी पढ़ें- शेख अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी फिर से बहाल करने की मांग, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विधानसभा में उठाया मुद्दा