डल झील में पेट्रोल या डीजल से चलने वाली मोटरबोट, मोटरयुक्त शिकारे और जेट स्की बैन, क्यों लिया गया ये फैसला?
जम्मू, कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने डल झील में पेट्रोल या डीजल से चलने वाली मोटरबोट, मोटरयुक्त शिकारे और जेट स्की पर बैन लगा दिया है। आइए जानते हैं इस बैन के फैसले के पीछे कारण क्या है।

कश्मीर की विश्व प्रसिद्ध पहचान और दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण, डल झील में अब पेट्रोल या डीजल से चलने वाली मोटरबोट, मोटरयुक्त शिकारे और जेट स्की नहीं चलेंगी। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने अगली सूचना तक ऐसी सभी नौकाओं के संचालन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि ऐसी किसी भी मोटरयुक्त नाव को चलने की अनुमति देना 'अदालत की अवमानना' माना जाएगा।
क्यों लगाया गया बैन?
डल झील कश्मीर के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है, जिसे देश-विदेश के पर्यटक बहुत पसंद करते हैं। यहां की खूबसूरती, यहां मौजूद हाउसबोट, शिकारे और मोटरबोट से और भी बढ़ जाती है, जो पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में इस झील की चमक और पहचान कम होने लगी है। इसका मुख्य कारण पेट्रोल और डीजल से चलने वाली मोटरबोट, मोटरयुक्त शिकारे और जेट स्की का इस्तेमाल है, जिनसे झील में तेजी से प्रदूषण फैला है। इसे रोकने के लिए, उच्च न्यायालय ने ईंधन से चलने वाली ऐसी सभी नौकाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है।
सभी मोटरबोट का संचालन बंद
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, डल झील में सभी मोटरबोट का संचालन बंद हो गया है। जहां एक ओर वे लोग निराश हैं जिनकी आजीविका इस काम पर निर्भर थी, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ताओं जिन्होंने झील को बचाने के लिए वर्षों तक संघर्ष किया है ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने डल झील के लिए आपातकालीन सेवाओं, कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन से जुड़े उच्च न्यायालय के अन्य निर्देशों का भी समर्थन किया है। आपको बता दें कि डल झील बीते लंबे समय से प्रदूषण, सीवेज, कचरे, अतिक्रमण और खरपतवार जैसी कई समस्याओं से जूझ रही है।
यह एक अच्छा कदम- पर्यावरणविद
इंडिया टीवी से बात करते हुए, एक्टिविस्ट और पर्यावरणविद डॉ. तौसीफ ने कहा- "यह एक अच्छा कदम है। साल 2021 में, मैंने पहली बार सरकार को सेशपोरा में ट्रांसपोर्ट के लिए इस्तेमाल हो रही अवैध मोटरों के बारे में लिखा था। तब से हर साल मैंने इस पर फॉलो-अप लिया है। इस साल भी मैंने सरकार को पत्र लिखकर बताया कि ये अवैध मोटरें हमारे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (aquatic ecology) और पानी की गुणवत्ता को खराब कर रही हैं, और जलीय जीवों को नुकसान पहुंचा रही हैं। उदाहरण के लिए, ये मछलियों और अन्य जीवों के प्रजनन चक्र (breeding cycles) में बाधा डालती हैं। मैं पिछले चार सालों से यह लड़ाई लड़ रहा हूं। मैं इस आदेश को जारी करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय का बहुत आभारी हूं। हालांकि, अब असली चुनौती इसे ज़मीनी स्तर पर लागू करने की है। बेशक, आपातकालीन सेवाओं (emergency services) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मैं माननीय उच्च न्यायालय को सलाम करता हूं, लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है।"
पर्यटन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा- सामाजिक कार्यकर्ता
सामाजिक कार्यकर्ता तारिक पटलू कहते हैं- "इस कदम से पर्यटन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा; बल्कि, यह एक स्वागत योग्य कदम है। यह हमारी उस पुरानी मांग के अनुरूप है, जिसमें हमने मोटरबोट के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही थी। हालांकि, मैं खुद भी मोटर से चलने वाली एम्बुलेंस चलाता हूं, लेकिन वह एक आपातकालीन सेवा है। उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद अब सवाल यह उठता है कि क्या कोई विकल्प निकाला जा सकता है जैसे कि इलेक्ट्रिक मोटरों का इस्तेमाल करना? हम इसका पूरा समर्थन करते हैं, क्योंकि हम झील को बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, एक ऐसा काम जिसके लिए हम लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सही प्रवर्तन (enforcement) और एक समर्पित टीम की जरूरत होगी। इसके अलावा, CRPF, हमारी अग्निशमन सेवाएं और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी इन नावों का इस्तेमाल करती हैं। एक बेहतर विकल्प की जरूरत है; जैसा कि उच्च न्यायालय ने सुझाव दिया है, शायद इलेक्ट्रिक मोटरों को लाया जा सकता है। हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं।"
कई लोग फैसले से बहुत परेशान भी
जो लोग सालों से डल झील में पर्यटकों को घुमा रहे हैं और झील की खूबसूरती दिखाने के लिए मोटरबोट और जेट स्की का इस्तेमाल करते हैं वे उच्च न्यायालय के इस फैसले से बहुत परेशान हैं। उनका कहना है कि देश और दुनिया भर की कई बड़ी झीलों में मोटरबोट चलती हैं, जिनसे कोई प्रदूषण नहीं होता। फिर भी, यहां एक ऐसा आदेश जारी कर दिया गया है जिसने हमारे सारे कामकाज को रोक दिया है। यह एक बहुत बड़ा अन्याय लगता है। एक ऐसा अन्याय जो पूरी तरह से हमारी आजीविका नष्ट हो जाएगी। हम कोई दूसरा विकल्प नहीं अपना सकते। डल झील पर्यटकों के लिए एक प्रमुख जगह है, और ये नावें यहां का मुख्य आकर्षण थीं। लोग हमेशा इनका भरपूर आनंद लेते थे और झील में सैर करते थे। पर्यटकों के लिए भी यह बहुत निराशाजनक बात है। अगर डल झील में पर्यटकों के लिए कोई गतिविधि ही नहीं बचेगी, तो उनके यहां आने का क्या मतलब रह जाएगा? इससे कम से कम 200 से 250 परिवार प्रभावित हुए हैं। मैं घाट नंबर 1 से लेकर घाट नंबर 20 या 25 तक के इलाके की बात कर रहा हूँ, साथ ही निगीन झील की भी, जहाँ ऐसी नावें चलती हैं। यहाँ हर जगह घाट हैं। नेहरू पार्क, डल गेट, चश्मे शाही और अन्य जगहों पर। मैं यहां जुड़े सभी लोगों की ओर से बात कर रहा हूं। इससे बहुत बड़ा नुकसान होगा। हमारी पूरी आजीविका इसी पर निर्भर है। इसी से हमारे परिवारों का गुजारा चलता है।
आपको बता दें बेंच ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे विशेषज्ञों के साथ मिलकर मोटर वाली नावों के लिए एक व्यापक नीति तैयार करें और इस बात पर विचार करें कि क्या पारंपरिक इंजनों की जगह सौर ऊर्जा से चलने वाले इलेक्ट्रिक इंजन लगाए जा सकते हैं।
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