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जम्मू-कश्मीर: उपराज्यपाल ने 48 अफसर ट्रांसफर किए तो भड़के CM अबदुल्ला, केंद्र को पत्र लिखा, विधायकों की बैठक बुलाई

केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच अक्सर टकराव होते रहे हैं। दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी के कार्यकाल में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच अक्सर टकराव की खबरें आती थीं।

Omar Abdullah- India TV Hindi
Image Source : PTI उमर अबदुल्ला

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच पहला विवाद सामने आया है। यहां उपराज्यपाल ने 48 अफसरों का तबादला कर दिया। इससे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला काफी नाराज हो गए। उन्होंने केंद्र को पत्र लिखा और शुक्रवार को श्रीनगर में सभी एनसी और कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक दल और सहयोगी दलों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और एलजी के बीच पहला विवाद तब शुरू हुआ जब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 48 जेकेएएस अफसरों के तबादले के आदेश जारी किए और इसके विरोध में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुख्य सचिव अटल डुल्लो, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा। पत्र में उमर ने इस कदम को "अवैध" बताया और इसे "सक्षम प्राधिकारी" यानी उनके कार्यालय द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया।

राजभवन पर लगाए आरोप

सूत्रों ने कहा कि सीएम ने राजभवन पर निर्वाचित सरकार के अधिकार का "अतिक्रमण" करने और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जिसके तहत ऐसे तबादलों के लिए मंत्रिपरिषद की मंजूरी अनिवार्य है। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर की पहली निर्वाचित सरकार के बाद से सामूहिक तबादलों का यह दूसरा मामला है। उमर द्वारा नवंबर 2024 में 20 अधिकारियों के तबादले रोकने के निर्देश के बावजूद, आदेशों का पालन किया गया।

कांग्रेस नेता ने की आलोचना

कांग्रेस के जीए मीर ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा केंद्र शासित प्रदेश में मध्यम और निचले स्तर के अधिकारियों के तबादले का आदेश देने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें अपना फैसला सुनाने से पहले कार्य नियमों की मंजूरी का इंतजार करना चाहिए था।

दिल्ली में भी होते रहे हैं टकराव

जम्मू कश्मीर से पहले दिल्ली में भी मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के बीच टकराव होते रहे हैं। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने लगातार उपराज्यपाल पर आरोप लगाए थे कि उनके कारण सरकार अपना काम ठीक से नहीं कर पा रही है। वहीं, उपराज्यपाल ने भी दिल्ली सरकार पर काम करने की बजाय बहाने बनाने के आरोप लगाए थे।