जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को विधानसभा में पांच विधेयक पेश किए। इनमें विधायकों और मंत्रियों के वेतन एवं भत्तों में बढ़ोतरी के साथ पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल है। प्रस्ताव के तहत विधायकों की मौजूदा कुल सैलरी 1.8 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये प्रतिमाह करने की बात कही गई है। उमर अब्दुल्ला के पास कानून, न्याय और संसदीय मामलों का मंत्रालय भी है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन अधिनियम, 1956 में संशोधन से जुड़ा विधेयक पेश किया। यह विधेयक आधिकारिक राजपत्र के विशेष अंक में पहले ही प्रकाशित हो चुका है।
विधायकों और पूर्व विधायकों को भी मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्यों के वेतन और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1960 में संशोधन के लिए भी विधेयक पेश किया। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्यों की पेंशन अधिनियम, 1984 में बदलाव का प्रस्ताव भी सदन में रखा गया। इन विधेयकों के जरिए मौजूदा विधायकों, मंत्रियों और पूर्व विधायकों के वेतन, भत्तों तथा पेंशन में बढ़ोतरी का रास्ता साफ करने की कोशिश की गई है।
हाउस कमेटी ने की थी सैलरी बढ़ाने की सिफारिश
विधायकों और मंत्रियों के वेतन एवं भत्तों में बढ़ोतरी का मुद्दा विधानसभा के पिछले सत्र में भी उठा था। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों को शामिल करते हुए एक सदन की समिति गठित की गई थी।
समिति ने प्रस्ताव पर सर्वसम्मति जताई थी। समिति ने मौजूदा कुल मासिक वेतन 1.8 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की सिफारिश की थी। इसमें विभिन्न भत्तों, टेलीफोन बिल और हाउस लोन से जुड़ी सुविधाओं को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था। फिलहाल वेतन और पेंशन में प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर विधेयकों पर विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
कानून को एकीकृत और संशोधित करने संबंधी एक विधेयक भी पेश
मुख्यमंत्री ने अनुमति आधारित नियंत्रण को नियम आधारित शासन से बदलने के लिए कानून को एकीकृत और संशोधित करने संबंधी एक विधेयक भी पेश किया। इसका उद्देश्य नागरिकों और कंपनियों को भरोसे के साथ योजना बनाने, निवेश करने और काम करने में सक्षम बनाना तथा केंद्र शासित प्रदेश में कारोबार सुगमता और जीवन सुगमता को बढ़ावा देना है ताकि जम्मू कश्मीर में रोजगार पैदा हों, निवेश आकर्षित हो और दीर्घकालिक आर्थिक विकास बना रहे। सीएम अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन से संबंधित एक विधेयक भी पेश किया।
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