श्रीनगर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 8वीं मुहर्रम का मातमी जुलूस गुरु बाजार से श्रीनगर के डलगेट तक निकाला गया। शुक्रवार को निकाले गए इस जुलूस में कश्मीर के अलग-अलग जिलों से शिया समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया। इस शोक जुलूस में जगह-जगह ईरान के नेता सैय्यद अयागा अली खुमानी और इजरायली हमले में मारे गए शीर्ष ईरानी कमांडरों और हिजबुल्लाह कमांडर हसन नसरल्लाह की तस्वीरें और बैनर लगाए गए थे। ईरान और फिलिस्तीन के झंडे लहराने और उनका समर्थन करने के अलावा कुछ लोगों ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारे भी लगाए।
Image Source : India TVजुलूस में फिलिस्तीनी झंडे
जुलूस में शामिल शिया लोगों ने कहा कि यह प्रदर्शन कश्मीर के शिया समुदाय और ईरान-फिलिस्तीन के भू-राजनीतिक संघर्षों के बीच एक ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध को दर्शाता है, जिसे अक्सर उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिरोध के रूप में देखा जाता है। जुलूस के सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था थी। सभी सुरक्षाकर्मी बेहद सतर्क थे। पूरे मार्ग को यातायात मुक्त रखा गया, ताकि जुलूस को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके। अन्य राज्यों की तरह यहां ताजिया के आकार पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
Image Source : India TVश्रीनगर में मुहर्रम जुलूस
2023 में मुहर्रम जुलूस से हटा प्रतिबंध
1990 के दशक में कश्मीर में हुए आतंकी हमलों के कारण 8वीं मुहर्रम के जुलूस पर रोक लगा दी गई थी। 2023 में तत्कालीन उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस प्रतिबंध को हटा दिया था। 2023 से हर साल यह जुलूस श्रीनगर के गुरु बाजार से शुरू होकर पारंपरिक मार्ग से होता हुआ जहांगीर चौक, बादशाह चौक, मौलाना आजाद रोड होते हुए डलगेट पहुंचता है। डलगेट में इस जुलूस का समापन होता है। अच्छी खबर यह है कि इस साल भी मुहर्रम के जुलूस में किसी भी जगह से किसी तरह की हिंसा या अप्रिय घटना की खबर नहीं आई है।
Image Source : India TVमुहर्रम जुलूस
बडगाम में दिखे फिलिस्तीनी झंडे
जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में प्रशासन और पुलिस ने सार्वजनिक जगहों से ईरान और हिज्बुल्लाह से जुड़े झंडों को हटाया था। हालांकि, मुहर्रम जुलूस के दौरान दोबारा ऐसे झंडे दिखने से विवाद बढ़ गया। बडगाम में भी मुहर्रम जुलूस के दौरान ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जुलूस में शामिल लोगों ने ईरान के समर्थन में नारेबाजी भी की। इजरायल-ईरान युद्ध में मारे गए बड़े कमांडर्स की तस्वीरें भी जुलूस में देखी गईं।