1. Hindi News
  2. जम्मू और कश्मीर
  3. J&K में आतंकियों ने बाहरी मजदूरों को दी धमकी, बताया ‘दिल्ली का मोहरा’, कहा- चले जाओ, वरना गोलियां चलेंगी

J&K में आतंकियों ने बाहरी मजदूरों को दी धमकी, बताया ‘दिल्ली का मोहरा’, कहा- चले जाओ, वरना गोलियां चलेंगी

यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) की ओर से पहले भी धमकियां दी जा चुकी हैं। इसके पहले धमकियां कश्मीरी पंडितों की दी गई थीं। इस बार जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले बाहरी मजदूरों को धमकी दी गई है।

आंतकी संगठन ने बाहरी मजदूरों को दी धमकी- India TV Hindi
Image Source : AP AND REPORTER INPUT आंतकी संगठन ने बाहरी मजदूरों को दी धमकी

सोशल मीडिया पर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) की ओर से कथित तौर पर धमकी भरा एक नया मैसेज सामने आया है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि ULC, प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक ऑनलाइन प्रॉक्सी फ्रंट है। इस बार धमकी भरे पत्र में खास तौर पर जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले बाहरी मजदूरों को निशाना बनाया गया है। उन पर स्थायी रूप से बसने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है और चेतावनी दी गई है कि लिंग या हैसियत की परवाह किए बिना उन्हें हिंसक नतीजों का सामना करना पड़ेगा। 

इलाके में भिखारी बनकर आए थे 'बाहरी लोग'- मैसेज में दावा

मैसेज में दावा किया गया है कि ये "बाहरी लोग" इलाके में भिखारी बनकर आए थे और अब रेजिडेंसी (निवास का अधिकार) पाने के लिए "प्रॉक्सी प्रशासन" के समर्थन से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें स्थानीय लोगों से उन्हें बाहर निकालने के लिए कहा गया है। विरोध प्रदर्शनों को दिखावा बताया गया है और कहा गया है कि जो लोग "दिल्ली के मोहरे" बने रहेंगे, वे "हमारी गोलियों के नतीजों" से बच नहीं पाएंगे और उनके शव उनके मूल स्थानों पर वापस भेज दिए जाएंगे। 

जुलाई और अगस्त में भी संगठन दे चुका धमकी

इस मैसेज का लहजा ULC के पहले के संदेशों जैसा ही है, जिसमें कब्जे और आबादी में बदलाव के बारे में राजनीतिक दावों के साथ-साथ आम नागरिकों को सीधे तौर पर डराने-धमकाने की बातें शामिल हैं। यह नया लेटर जुलाई-अगस्त 2026 से ULC की धमकियों के सिलसिले का ही एक हिस्सा है। 

पहले कश्मीरी पंडितों की दी गईं धमकियां

पहले की धमकियां मुख्य रूप से प्रधानमंत्री के पुनर्वास पैकेज के तहत काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों पर केंद्रित थीं। उन संदेशों में लोगों के नाम लिए गए थे, पते और गाड़ी के नंबर जैसी निजी जानकारी छापी गई थी। उन पर नजर रखने व निशाना बनाने की चेतावनी दी गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने इन पोस्टरों को मनोवैज्ञानिक युद्ध माना है, जिसका मकसद डर पैदा करना और वापसी व पुनर्वास की कोशिशों को रोकना है।

बाहरी मजदूरों में डर का माहौल 

जुलाई में कुलगाम जिले में ईंट भट्ठे के दो मजदूरों की टारगेटेड हत्याओं के बाद से ही बाहरी मजदूरों में डर का माहौल है। इस तरह के हमलों ने पहले भी मौसमी बाहरी मजदूरों को परेशान और डराया है। भारत के दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में मौसमी मजदूर घाटी में काम करने आते हैं और स्थानीय लोग उन्हें निर्माण कार्य, ईंट भट्ठों, बागों और दूसरे कामों में लगाते हैं।

सीएम समेत शीर्ष अधिकारियों ने जताई चिंता 

जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों, जिनमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी शामिल हैं। इन शीर्ष अधिकारियों ने पहले ULC-स्टाइल के पोस्टरों को बहुत चिंताजनक बताया है और पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों को इन्हें गंभीरता से लेने का निर्देश दिया है। कश्मीरी पंडित पहले से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने बेहतर सुरक्षा की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री और NC प्रमुख ने उन धमकी भरे पत्रों पर सवाल उठाए और उनकी गहराई से जांच की मांग की।

धमकी भरे संदेशों की हो रही जांच 

एजेंसियां ​​इन व्यक्तिगत संदेशों की सच्चाई की जांच कर रही हैं और साथ ही उन पर नजर रख रही हैं, क्योंकि ये आम नागरिकों को डराने या हिंसा भड़काने के इरादे के संभावित संकेत हो सकते हैं। कुल मिलाकर, ये ऑनलाइन धमकियां LeT से जुड़े उन गुप्त संगठनों द्वारा डराने-धमकाने के पैटर्न का हिस्सा हैं, जो सांप्रदायिक और जनसांख्यिकीय मतभेदों का फायदा उठाना चाहते हैं।

ये भी पढ़ें: 

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में मारा गया लश्कर कमांडर, पाकिस्तान का रहने वाला था