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17 साल की छात्रा की मौत से मचा बवाल, परिजनों ने डॉक्टर को ठहराया जिम्मेदार, पीएम रिपोर्ट का इंतजार

17 साल की छात्रा की मौत के बाद छतरपुर में हंगामा हो गया। छात्रा सिविल लाइन थाना क्षेत्र के शांति नगर कॉलोनी में किराए से रहकर पढ़ाई कर रही थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर की लापरवाही से बच्ची की जान चली गई।

17 साल की छात्रा की मौत से मचा बवाल- India TV Hindi
Image Source : STRINGER INPUT 17 साल की छात्रा की मौत से मचा बवाल

छतरपुर में उस समय आक्रोश फैल गया, जब बड़ा मलहरा की रहने वाली 17 वर्षीय छात्रा शिवानी यादव की शनिवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एक निजी डॉक्टर द्वारा दी गई दवा के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। इसके विरोध में लोगों ने जिला अस्पताल के बाहर सड़क जाम कर दी, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। डॉक्टर की लापरवाही से जुड़ी खबरें दिन बाद दिन सामने आ रही है। हाल ही में डिंडौरी जिला चिकित्सालय से महिला वार्ड में भर्ती 54 वर्षीय नरबदिया बाई बनवासी की कथित तौर पर डॉक्टर की गैरमौजूदगी और स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के बीच मौत होने की खबर मिली थी।

परिजनों का क्या आरोप है?

शिवानी अपनी पढ़ाई के सिलसिले में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के अंतर्गत शांति नगर कॉलोनी में एक किराए के मकान में रह रही थी। उसके पिता के अनुसार शुक्रवार को उसकी तबीयत खराब थी, जिसके बाद उसे निजी डॉक्टर आभा खरे के पास ले जाया गया। बताया जा रहा है कि शुरुआती जांच में सब कुछ सामान्य पाया गया और उसे एक गोली दी गई। परिजनों का आरोप है कि दवा लेने के बाद शिवानी को उल्टियां होने लगीं और रात में उसे तेज सिरदर्द की शिकायत हुई। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे झांसी के एक बड़े मेडिकल सेंटर के लिए रेफर कर दिया।

रेफर किए जाने के दौरान मौत

झांसी में शुरुआती इलाज के बाद शिवानी को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया गया। हालांकि, शनिवार सुबह करीब 9:00 बजे झांसी से ग्वालियर ले जाते समय उसकी मौत हो गई। बाद में दुखी परिवार उसके शव को वापस छतरपुर ले आया। उसके पिता वीरेंद्र यादव ने दावा किया कि दवा लेने से पहले शिवानी बिल्कुल ठीक थी। उन्होंने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि परिवार ने सबूत के तौर पर उस गोली को संभाल कर रखा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

जिला अस्पताल के बाहर विरोध-प्रदर्शन

शव के पहुंचते ही नाराज परिजन और स्थानीय लोगों ने उसे जिला अस्पताल के बाहर मुख्य सड़क पर रख दिया और ट्रैफिक जाम कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर समय पर सही इलाज मिला होता तो शिवानी की जान बच सकती थी। उन्होंने इस कथित मेडिकल लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की। सूचना मिलने पर सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन की एक टीम, जिसमें सिटी पुलिस अधीक्षक अरुण सोनी भी शामिल थे, मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने दुखी परिवार से बात की। उन्हें निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया और ट्रैफिक व्यवस्था को बहाल करवाया।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

सीएसपी ने बताया कि छात्र की मौत के मामले में परिवार के आरोपों के आधार पर एक औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है। मौत का सही कारण पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस के अनुसार जांच पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुरक्षित रखी गई दवाओं, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितियों से जुड़े सबूतों के आधार पर आगे बढ़ेगी। अगर मेडिकल विशेषज्ञों का पैनल डॉक्टर की ओर से किसी तरह की पेशेवर लापरवाही (प्रोफेशनल नेग्लिजेंस) पाता है तो उसके अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने स्थानीय लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले मेडिकल जांच और पुलिस की रिपोर्ट का इंतजार करें।

(Prem Gupta)

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