राहुल गांधी की रैली में नहीं पहुंचे तो यूथ कांग्रेस के 60 नेता निलंबित, संगठन में बगावत के सुर, रोहित राजोरिया बोले- हमारे साथ अन्याय हुआ
मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस में राहुल गांधी की रैली में शामिल नहीं होने पर 60 नेताओं के निलंबन से नाराजगी है। रोहित राजोरिया ने बिना नोटिस कार्रवाई को अन्याय बताते हुए हाईकमान तक बात पहुंचाने की बात कही।

मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस में इन दिनों अंदरूनी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित राहुल गांधी के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने के कारण यूथ कांग्रेस के करीब 60 नेताओं को निलंबित किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। संगठन की इस कार्रवाई से प्रभावित नेताओं में भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि बिना किसी कारण बताओ नोटिस और पक्ष रखने का मौका दिए सीधे निलंबन की कार्रवाई कर दी गई। निलंबित नेताओं का कहना है कि वे वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे हैं, आंदोलनों में हिस्सा ले रहे हैं और कई बार जेल भी जा चुके हैं, लेकिन मुश्किल पारिवारिक परिस्थितियों में कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने पर संगठन ने उनकी सेवाओं को नजरअंदाज कर दिया। निलंबित यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी रोहित राजोरिया ने इस कार्रवाई को अपने साथ अन्याय बताते हुए संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व और हाईकमान के सामने अपनी बात रखने की बात कही है।
चाचा के निधन के कारण नहीं पहुंच पाए दिल्ली, सोशल मीडिया से मिली निलंबन की जानकारी
निलंबित यूथ कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी रोहित राजोरिया ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने संगठन के लिए लंबे समय तक रात-दिन मेहनत की है और अपना खून-पसीना लगाया है। इसके बावजूद उनके साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उससे वह बेहद दुखी हैं। राजोरिया के मुताबिक, वह 15 अक्टूबर को दिल्ली से अपने घर लौटे थे और अगले ही दिन यानी 16 अक्टूबर को उनके चाचा का निधन हो गया। परिवार में हुई इस दुखद घटना के कारण वह मानसिक और पारिवारिक परेशानी से गुजर रहे थे। इसी वजह से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित राहुल गांधी के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से न तो उनसे कोई संपर्क किया गया और न ही उनकी पारिवारिक स्थिति जानने की कोशिश हुई। उन्हें अपने निलंबन की जानकारी भी सोशल मीडिया के जरिए मिली। राजोरिया ने कहा कि इस कार्रवाई से उन्हें काफी मायूसी हुई है। परिवार में पहले से दुख का माहौल था और संगठन के इस फैसले ने उनकी मानसिक परेशानी और बढ़ा दी।
बिना नोटिस और जवाब का मौका दिए निलंबन पर उठाए सवाल
रोहित राजोरिया ने संगठन की कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि किसी भी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसे कारण बताओ नोटिस दिया जाना चाहिए। संबंधित व्यक्ति का पक्ष सुनने और उसके कारणों की जांच करने के बाद ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए। यदि कोई कार्यकर्ता बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद संगठन के प्रति निष्क्रिय रहता है, तभी उसे संगठन से अलग करने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। राजोरिया ने सवाल उठाया कि आखिर बिना जवाब मांगे और बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए करीब 60 लोगों को निलंबित कैसे कर दिया गया? उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनके साथ नहीं, बल्कि उन सभी कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय है, जिन्होंने संगठन के लिए लंबे समय तक काम किया है। उन्होंने इस मामले को हाईकमान के सामने उठाने और अपने साथ न्याय की मांग करने की बात कही।
16 साल से संगठन में सक्रिय, 12 से 13 मुकदमे और तीन बार जा चुके हैं जेल
अपनी राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए रोहित राजोरिया ने बताया कि वह करीब 2010 से यूथ कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हैं। संगठन के आंदोलनों और गतिविधियों में भाग लेने के दौरान उनके खिलाफ 12 से 13 मुकदमे दर्ज हुए। वह तीन बार जेल भी जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग मामलों में उन्हें तीन दिन, एक दिन और करीब 13 दिन तक जेल में रहना पड़ा। उनका कहना है कि इतने वर्षों तक संगठन के लिए संघर्ष करने के बाद इस तरह निलंबित किया जाना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है। राजोरिया ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी काफी ज्यादा है, लेकिन वह इस मामले को संगठन के भीतर ही उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने हैं और वह राष्ट्रीय कार्यकारिणी तथा हाईकमान से बातचीत कर अपने साथ हुए व्यवहार पर जवाब मांगेंगे। उनकी कोशिश है कि उनके साथ न्याय हो और भविष्य में किसी दूसरे कार्यकर्ता को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
नेहा बोरा ने भी उठाई सम्मान और बराबरी के मौके की मांग
इस पूरे मामले के बीच यूथ कांग्रेस की नेता नेहा बोरा ने भी संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान और अवसर मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनके जैसे कई युवा कार्यकर्ता चाहते हैं कि उन्हें भी बड़े मंचों पर जगह मिले और राहुल गांधी के साथ बैठने, बातचीत करने तथा संगठन के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिले। नेहा बोरा के मुताबिक कई कार्यकर्ता 15 से 16 साल से संगठन के लिए लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद करने और उनके करीब रहकर काम करने का पर्याप्त मौका नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यह इच्छा सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि संगठन के कई पुराने कार्यकर्ताओं की है। उनका मानना है कि जो लोग लंबे समय से पार्टी के लिए मेहनत कर रहे हैं, उन्हें भी नेतृत्व के साथ जुड़ने और अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
संगठन की चुनाव प्रक्रिया पर भी हुई चर्चा
बातचीत के दौरान यूथ कांग्रेस में पदों के चयन और वंशवाद के सवाल पर भी चर्चा हुई। इस पर रोहित राजोरिया ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष का चयन नियुक्ति के बजाय चुनाव प्रक्रिया के जरिए हुआ है। इसमें सदस्यता अभियान और मतदान के आधार पर नेताओं का चुनाव किया गया। उन्होंने कहा कि जिसने ज्यादा से ज्यादा लोगों को संगठन से जोड़ा और अपने पक्ष में समर्थन जुटाया, उसे चुनाव में फायदा मिला। फिलहाल 60 नेताओं के निलंबन को लेकर यूथ कांग्रेस के भीतर असंतोष सामने आ रहा है। अब देखना होगा कि रोहित राजोरिया और अन्य नाराज नेता अपनी शिकायत हाईकमान तक पहुंचाने के बाद क्या संगठन के फैसले में बदलाव करा पाते हैं या यह विवाद मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस में आगे और गहराता है।