उज्जैन के कंठाल चौराहा, छत्रीचौक मार्ग के चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे खड़े हनुमान अपनी जगह से टस से मस होने को तैयार नहीं हैं। गुरुवार रात 11 बजे से नगर निगम अमले ने प्रतिमा की शिफ्टिंग शुरू की, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। पुरातत्व विभाग की टीम भी जांच के लिए आ चुकी है परंतु कोई हल नही निकल पाया। नुकसान से बचाने के लिए प्रतिमा को पॉलीथिन से पैक करने के बाद फिर से पैकिंग खोली गई। फिलहाल प्रतिमा अपनी जगह पर ही है। बस हनुमान जी केनोपी के नीचे विराजे हैं। हालांकि हिंदूवादी संगठन व पंडित की सहमति से मंदिर की दीवार, गुम्बज व शिखर हटा दिया गया है।
वर्तमान समय मे मन्दिर के आस पास भक्तों का तांता लगा हुआ है। अब भक्तों का कहना है कि जब प्रयास के बाद भी प्रतिमा नही हट रही तो क्यों न यहीं रहने दिया जाए। मन्दिर पास भजन चल रहे है। भक्तों की लंबी लंबी कतारें देखी जा सकती है।
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दरअसल, करीब 150 साल से ज्यादा पुराने खड़े हनुमान मंदिर से पूरे शहर का आस्था भरा जुड़ाव है। ऐसा कोई भी सनातनी नहीं होगा, जो अपने जीवनकाल में बाबा के दर पर एक बार नहीं पहुंचा होगा। उत्तम स्वास्थ्य व बीमारी दूर करने के लिए झाड़ा लगाने तो रोजाना ही लोगों की कतार लगी रहती है। सिंधिया स्टेट के जमाने से स्थापित यह प्रतिमा दिव्य है।
क्यों रोका गया प्रतिमा शिफ्टिंग का काम
मंदिर का गुंबद और दीवारें टूट चुकी हैं। आसपास के स्थल को साफ कर दिया है, इस मंदिर के स्थान पर मूर्ति ही खड़ी है। शाम को रोज की तरह हनुमानजी का पूजन उसी स्थान पर हुआ। आरती के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित रहते है। हालाकि क्षेत्रवासियों का कहना था कि लोगों की भावना को देखते हुए महाकाल सवारी के बाद हनुमानजी को शिफ्ट करना चाहिए। यही कारण है प्रतिमा शिफ्टिंग का कार्य रोक दिया गया। महाकाल सवारी भी निकल चुकी है अब फिर से कार्य शुरू होगा।
जमीन पर खड़े हनुमानजी की यह प्रतिमा 8 फीट ऊंची है। प्रतिमा को बगैर सहारे के खड़ा रखने के लिए प्रतिमा का हिस्सा शिला पर खड़ा किया गया है। 4 से 5 फी की शिला जमीन के नीचे है। जमीन से प्रतिमा निकालने के लिए आसपास की खुदाई फिर से की जाएगी।
(उज्जैन से प्रेम डोडिया की रिपोर्ट)
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