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भोपाल: पुलिसकर्मी बनने के लिए अपनाया ठगों वाला तरीका, आधार कार्ड वेंडर के साथ मिलकर किया घोटाला, जानें कैसे पकड़ाए

इस मामले में आधार कार्ड वेंडर को भी आरोपी बनाया गया है, जिन्होंने उम्मीदवारों की आईडी सही से वेरिफाई नहीं की और उन्हें आधार कार्ड जारी कर दिए।

Representative Image- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO प्रतीकात्मक तस्वीर

मध्य प्रदेश के भोपाल में पुलिस भर्ती की परीक्षा देने वाले 22 उम्मीदवारों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। आरोप है कि इन उम्मीदवारों ने आधार कार्ड के साथ छेड़छाड़ कर परीक्षा में किसी और को बैठा दिया। इसके बाद फिजिकल वेरिफिकेशन के समय दूसरा इंसान सामने आया। शुरुआती जांच में सारे रिकॉर्ड ठीक थे, लेकिन जब परीक्षा के समय दिए गए आधार कार्ड से मिलान किया गया तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया। कई उम्मीदवारों के फिंगरप्रिंट मेल नहीं खा रहे थे। इसके बाद सभी आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।

22 उम्मीदवारों के खिलाफ मामले दर्ज

कानून व्यवस्था के आईजी अंशुमान सिंह ने बताया कि फिजिकल टेस्ट के दौरान 22 उम्मीदवारों के आधार कार्ड फर्जी पाए गए। इसके बाद पुलिस की तरफ से कार्रवाई की गई है। मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल, जीडी और रेडियो के पदों पर भर्ती के लिए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड ने 2023 में ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की थी। रिजल्ट के आधार पर चयन शाखा भोपाल ने 2024 में चयनित उम्मीदवारों का फिजिकल टेस्ट लिया, जिसमें गड़बड़ी का खुलासा हुआ।

आधार कार्ड वेंडर भी आरोपी

आईजी के अनुसार फिजिकल टेस्ट के दौरान चयन समिति को पता चला कि पांच उम्मीदवार फर्जी आधार कार्ड के साथ परीक्षा में शामिल हुए थे। जांच करने पर अलग-अलग जिलों में कुछ मामले देखे गए हैं, जिनमें (आधार कार्ड में) अंतर पाया गया है। इसके आधार पर अब तक 21 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 22 उम्मीदवार आरोपी हैं। शुरुआती जांच में पता चला कि आधार कार्ड वेंडर ने उम्मीदवारों की आईडी को पूरी तरह से वैरिफाई नहीं किया और उसे अधूरा अपडेट किया। इस मामले में आधार कार्ड वेंडर भी आरोपी हैं।

क्या हैं आरोप?

22 उम्मीदवारों के खिलाफ आरोप है कि इन्होंने 2023 में ऑनलाइन परीक्षा देने से पहले अपना आधार कार्ड अपडेट कराया था। इस दौरान उनके फिंगरप्रिंट बदल दिए गए थे। आशंका है कि नए फिंगरप्रिंट किसी सॉल्वर के थे, जिसने असली उम्मीदवार की जगह परीक्षा दी। परीक्षा में पास होने के बाद इन अभ्यर्थियों ने दोबारा आधार कार्ड अपडेट कराए और फिर से असली उम्मीदवार के फिंगरप्रिंट अपडेट कर दिए गए। ऐसे में फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान भी सब कुछ सही पाया गया। आमतौर पर इसके बाद उम्मीदवारों को ज्वाइनिंग दे दी जाती है, लेकिन चयन बोर्ड ने लिखित परीक्षा के समय से आंकड़े मिलाने का फैसला किया। इसी वजह से पूरा मामला सामने आया। सीएम मोहन यादव ने सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।