भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और उनके सपोर्टर्स ने भोपाल के एक मुफ्ती को समाज का दुश्मन बताया है। उन्होंने मुफ्ती के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। दरअसल में हुआ ये कि ईद मिलाद उल नबी के मौके पर आरिफ मसूद ने एक जुलूस निकाला था। इस जुलूस में बुर्का पहने कुछ महिलाएं लकड़ी की तलवार लेकर करतब दिखाते हुए नजर आईं थी। इसका वीडियो खूब सर्कुलेट हुआ। भोपाल के शहर मुफ्ती अबुल कलाम ने महिलाओं की तलवारबाजी को इस्लाम के उसूलों के खिलाफ बताया। अबुल कलाम ने कहा कि औरतें तलवार लेकर सड़क पर नाचें। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ये इस्लाम की तौहीन है।
मुफ्ती का ये रूख आरिफ मसूद और उनके सपोर्टर्स को पसंद नहीं आया। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने मुफ्ती अबुल कलाम को पद से हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बहन बेटियों का अपमान करने वाले मुफ्ती को तुरंत जेल भेज देना चाहिए।
महिला आयोग में शिकायत
कांग्रेस विधायक ने कहा कि जो लड़कियां जुलूस में शामिल हुई थीं, उनके परिवार की महिलाएं भी मुफ्ती के खिलाफ शिकायत लेकर महिला आयोग के दफ्तर पहुंच गईं। इन लोगों ने कहा कि अगर बेटियां घर से बाहर निकलती हैं। अपना हुनर दिखाती हैं तो मुफ्ती को इसमें क्या दिक्कत है। बेटियों पर भद्दे कमेंट करने वाले मुफ्ती को सजा जरूर मिलनी चाहिए।
वहीं, मध्य प्रदेश महिला आयोग अब मुफ्ती अबुल कलाम को नोटिस भेजेगा और जवाब मांगेगा। मुफ्ती अबुल कलाम ने कहा कि जुलूस में जो हुआ वो इस्लाम की तालीम के खिलाफ था। इसलिए वो इस मामले में चुप नहीं रह सकते।
मुफ्ती अबुल कलाम के बयान पर सियायत
मुफ्ती अबुल कलाम ने जो किया, वो वाकई में मजहब की तौहीन है लेकिन केरल के बड़े सुन्नी लीडर कंथापुरम एपी अबूबकर मुस्लियार तो और आगे बढ़ गए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम औरतों को घरों तक सीमित रहना चाहिए। सार्वजनिक जगहों पर उनका आना बड़ा नुकसान कर सकता है। बता दें कि कंथापुरम कोई साधारण नेता नहीं हैं। वो ग्रैंड मुफ्ती ऑफ इंडिया हैं और समस्ता नाम के सुन्नी संगठन के कंथापुरम गुट के महासचिव हैं। उन्होंने बकायदा एक सर्कुलर जारी करके कहा कि मजहबी जलसों में भी औरतों को मंच पर बुलाना और गैर मर्दों के बीच उनका सार्वजनिक उपस्थिति गलत है।
इस पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। कंथापुरम के इस बयान को CPM और कांग्रेस ने आलोचना किया और कहा कि ये महिलाओं को सैकड़ों साल पीछे धकेलने वाली सोच है लेकिन केरल की UDF सरकार में शामिल Indian Union Muslim League ने इस मामले में कंथापुरम का विरोध नहीं किया..बल्कि IUML ने उनके बयान का बचाव करते हुए इसे एक धार्मिक विद्वान की राय बताया।
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