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बागेश्वर धाम सरकार की हिंदू एकता रथ यात्रा का असर, कई गांवों ने लिया नशामुक्ति का संकल्प

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हिंदू एकता रथ यात्रा के दौरान बुंदेलखंड के कई गांवों ने नशामुक्ति का संकल्प लिया। 5 जिलों से गुजरी इस यात्रा में सामाजिक समानता, हिंदू एकता और नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।

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Image Source : REPORTER INPUT बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री।

Highlights

  • धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हिंदू एकता रथ यात्रा में नशामुक्ति का संदेश बना प्रमुख मुद्दा।
  • बागेश्वर धाम सरकार ने कहा, बुंदेलखंड की प्रमुख समस्याओं में नशा भी शामिल है।
  • पांच जिलों में उमड़ी भीड़, श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर किया यात्रा का स्वागत।

भोपाल: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हिंदू एकता रथ यात्रा में नशामुक्ति का संदेश प्रमुखता से सामने आया। 11 से 15 अक्टूबर तक निकली इस यात्रा के दौरान कई गांवों में लोगों ने नशा छोड़ने का संकल्प लिया। बाबा बागेश्वर ने कहा कि बुंदेलखंड की प्रमुख समस्याओं में नशा भी शामिल है। यात्रा के जरिए युवाओं को शराब से दूर रहने और अच्छे संस्कार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

'कई गांवों ने नशामुक्ति का संकल्प लिया'

यात्रा के अनुभव साझा करते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा,

'हमारी यात्रा हमें तो लगा कि बहुत अद्भुत हुई और कई गांवों ने नशामुक्ति का संकल्प लिया, जो बुंदेलखंड की प्रमुख परेशानी है।'

बाबा बागेश्वर ने कहा कि यात्रा के दौरान लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और नशे से दूर रहने का संकल्प लेकर सामाजिक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने नशामुक्ति को क्षेत्र की एक अहम जरूरत बताते हुए लोगों की भागीदारी पर संतोष जताया।

5 जिलों से गुजरी हिंदू एकता रथ यात्रा

11 से 15 अक्टूबर तक चली यह यात्रा करीब 500 किलोमीटर के मार्ग पर निकाली गई। इसमें पन्ना, हटा, दमोह, सागर और टीकमगढ़ क्षेत्र शामिल रहे। यात्रा के दौरान अलग-अलग गांवों और सड़कों पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में जुटे। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि लोग करीब 10 से 15 किलोमीटर तक सड़क पर आकर उनसे संवाद कर रहे थे। उनके अनुसार, पांचों जिलों में लोगों ने उत्साह के साथ यात्रा में हिस्सा लिया।

'8-9 घंटे तक सड़क पर खड़े रहे लोग'

यात्रा में उमड़ी भीड़ को लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा,

'बड़ी शक्ति, धैर्य, साहस, उत्साह और उमंग के साथ लोग इस यात्रा में जुड़े। हजारों लोग आठ-आठ, नौ-नौ घंटे तक सड़कों पर रहे। यह भक्ति और श्रद्धा थी।'

बाबा बागेश्वर ने यात्रा को विचारों की क्रांति से जोड़ते हुए कहा कि जब विचार बदलते हैं, तो समाज में सुधार आता है। उनके मुताबिक, समाज में बदलाव से देश में भी परिवर्तन की राह बनती है।

छुआछूत और भेदभाव खत्म करने की अपील

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि यात्रा के दौरान लोगों से संवाद कर हिंदू एकता और सामाजिक समानता का संदेश दिया गया। उन्होंने कहा,

'छुआछूत, भेदभाव की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई।'

बागेश्वर धाम सरकार ने कहा कि यात्रा में शामिल लोगों तक यही संदेश पहुंचाने की कोशिश की गई कि समाज में आपसी भेदभाव कम हो और लोग एक-दूसरे के साथ भाईचारे से रहें। उन्होंने यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विचारों के जरिए समाज में बदलाव लाने का प्रयास बताया।

जेसीबी और हार्वेस्टर से बरसाए गए फूल

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने अलग-अलग जगहों पर अनोखे अंदाज में स्वागत किया। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा,

'पांचों जिलों में क्रेन, हार्वेस्टर और जेसीबी जैसी मशीनों की मदद से फूल बरसाए गए।'

सड़कों पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और घंटों तक इंतजार करने वाले श्रद्धालुओं का उत्साह भी चर्चा में रहा। यात्रा के दौरान हुए इन स्वागत कार्यक्रमों ने लोगों का ध्यान खींचा। आयोजकों के लिए नशामुक्ति और सामाजिक एकता के संदेश को लोगों तक पहुंचाना भी अहम रहा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोले बाबा?

यात्रा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने फैसले का स्वागत करते हुए कहा,

'बहुत अद्भुत निर्णय है। धन्यवाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय का।'

उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन करने वालों को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए और पूरे देश को इस फैसले का स्वागत करना चाहिए। शास्त्री ने धर्मांतरण कराने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई की जरूरत बताई और कहा कि फैसले के बाद यह मुद्दा देशव्यापी हो गया है।