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बाढ़ में बकरियों संग फंसा बुजुर्ग चरवाहा, जलस्तर घटते ही ग्रामीणों ने बचाई जान, किया रेस्क्यू

बाढ़ के पानी में अपनी बकरियों के साथ फंसे एक बुजुर्ग चरवाहे को पानी का स्तर कम होने पर ग्रामीणों ने सुरक्षित बचा लिया। बुरहानपुर में मंगलवार सुबह से लगातार बारिश हो रही है, जिसकी वजह से कई लोगों को परेशानी हुई।

MP News- India TV Hindi
Image Source : STRINGER INPUT बकरियों के साथ बाढ़ में फंसा बुजुर्ग

मध्य प्रदेश के जिला बुरहानपुर में मंगलवार को रुक-रुक कर बारिश होती रही, जिससे कई नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। हालात तब ज्यादा चिंताजनक हो गए, जब आदिवासी बहुल इलाके धुलकोट में, आस-पास की पहाड़ियों से बहने वाली नदियां घंटों की बारिश के बाद उफान पर आ गईं। धुलकोट इलाके के धोंड गांव में तनावपूर्ण स्थिति तब पैदा हुई, जब सुक्ता नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। नदी के पास गए एक बुजुर्ग चरवाहे अपनी तीन बकरियों के साथ तेजी से बढ़ते बाढ़ के पानी में फंस गए। बताया जा रहा है कि वह नदी पार नहीं कर पाए और लगभग डेढ़ घंटे तक फंसे रहे।

बाढ़ में बकरियों के साथ फंसा था बुजुर्ग चरवाहा

बुजुर्ग की मुश्किल हालत देखकर गांव वाले नदी के किनारे जमा हो गए। वे उन पर नजर रखे हुए थे और पानी का स्तर कम होने का इंतजार करते हुए उनका हौसला बढ़ाते रहे। जैसे ही पानी का बहाव धीरे-धीरे कम हुआ, गांव वालों ने रस्सी की मदद से बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद वे बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब रहे। उनकी तीनों बकरियों को भी सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना से निवासियों में घबराहट फैल गई। खासकर इसलिए, क्योंकि सुक्ता नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। गांव वालों ने राहत की सांस ली कि बुजुर्ग और उनके जानवर बिना किसी गंभीर चोट के इस खतरनाक स्थिति से बच निकले।

लोगों की लापरवाही बना खतरा

स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मॉनसून के मौसम में लोगों को नदियों, नालों और निचले इलाकों से दूर रहने की चेतावनी कई बार दी है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को उफान पर बह रही नदियों या जल-धाराओं को पार करने की कोशिश न करने की सलाह भी दी है, क्योंकि पानी का बहाव बिना किसी चेतावनी के बढ़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश हो रही हो। बार-बार दी गई इन चेतावनियों के बावजूद लोग कभी-कभी जानवरों को चराने, जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने या रोजमर्रा के दूसरे कामों के लिए खतरनाक इलाकों में चले जाते हैं। हाल की घटना ने एक बार फिर पहाड़ी और आदिवासी इलाकों में भारी बारिश के दौरान लोगों के सामने आने वाले खतरों को उजागर किया है।

(इनपुट - शारिक अख्तर दुर्रानी)

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