भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मंत्री पारस चंद्र जैन अब इस दुनिया में नहीं रहे। सोमवार, 3 अगस्त को उनका निधन हो गया। पारस जैन का इंदौर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने 77 वर्ष की आयु में अपनी आखिरी सांस ली। शिवराज मंत्रिमंडल में पारस जैन राज्य के वन, खाद्य नागरिक आपुर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण और स्कूल शिक्षा के साथ ऊर्जा मंत्री रहे। उन्होंने लंबे समय तक उज्जैन उत्तर विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया और छह बार विधायक रहे। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी पारस जैन के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
पहलवान के नाम से मशहूर थे पारस जैन
पारस जैन पहलवान नेता के रूप में प्रसिद्ध थे। हालांकि, उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला। पारिवारिक सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से पारस जैन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके फेफड़ों में पानी भर गया था, समस्या का पता चलने के बाद उन्हें इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शोक व्यक्त किया
सीएम मोहन यादव ने पारस जैन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री एवं उज्जैन उत्तर के पूर्व विधायक पारस चंद्र जैन के निधन का समाचार सुनकर मन दुखी है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। बाबा महाकाल से प्रार्थना है कि दिवंगत को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें एवं शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति दें।'
महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली
पारस जैन मध्यप्रदेश के चर्चित नेताओं में से रहे हैं। वह 2005 से राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, वन, ऊर्जा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी संभाली। जैन साल 2018 तक मंत्री रहे। जैन छह बार मध्यप्रदेश के उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे।
छह बार किया उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व
पारस जैन ने 1990, 1993, 2003, 2008, 2013 और 2018 में उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया और छह बार विधायक रहे। भाजपा सरकार में कई बार मंत्री रहने के बावजूद पारस जैन अपने मिलनसार व्यवहार के लिए मशहूर थे। वह अक्सर उज्जैन की सड़कों पर स्कूटर से घूमते हुए अपने दोस्तों से मिलते रहते थे। उनके परिवार की बात करें तो निधन के बाद वह अपने पीछे अपनी पत्नी, एक बेटे और एक बेटी को छोड़ गए। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को उज्जैन में किया जाएगा।
(उज्जैन से प्रेम डोडिया की रिपोर्ट)
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