एमपी पुलिस के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर DGP ने जारी की गाइडलाइंस, नहीं मानने पर नपेंगें पुलिसकर्मी
मध्य प्रदेश पुलिस के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइंस जारी की गई हैं। इनका पालन नहीं करने पर आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ एक्शन हो सकता है।

भोपाल: सोशल मीडिया के दौर में पुलिसकर्मी भी रील और वीडियो बनाने से अछूते नहीं हैं। वह वर्दी में ही कई बार इस तरह का कंटेंट सोशल मीडिया पर डालते है, जिससे पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में इस तरह की हरकतों पर नकेल कसने के लिए मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना ने मध्य प्रदेश पुलिस विभाग के लिए सोशल मीडिया उपयोग के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
एमपी पुलिस के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइंस-
- फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब एवं अन्य सोशल मीडिया पर, ड्यूटी के दौरान या इसके उपरांत वर्दी में अथवा अन्य अशोभनीय वेशभूषा में रील, फोटो, वीडियो, अथवा ऑडियो क्लिप आदि अपलोड न किए जावें। इस प्रकार के अनुचित कंटेंट सोशल मीडिया से तत्काल हटाए जाएं तथा भविष्य में इन निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए।
- शासकीय दस्तावेजों को स्कैन कर, स्क्रीनशॉट लेकर अथवा अन्य किसी प्रकार से सोशल मीडिया पर ऐसी कोई जानकारी शेयर न की जाए जो कि शासकीय नियमों के अन्तर्गत गोपनीयता हेतु आवश्यक एवं सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हो। इसके अलावा इन्हें ChatGPT, Gemini आदि AI टूल्स पर अपलोड नहीं किया जाए।
- संवेदनशील ड्यूटी पर कार्यरत रहते हुए सौंपे गए दायित्व, कार्य की प्रकृति एवं कार्य का स्थान आदि सोशल मीडिया पर प्रकट न किए जाएं। ऐसे संवेदनशील कार्य स्थलों पर लोकेशन एवं जियो टैगिंग आदि के ऑप्शन भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल के दौरान बंद रखे जाएं ताकि किसी प्रकार के दुरुपयोग की संभावना से बचा जा सके।
- शासन के पूर्व अनुमोदन के बिना स्वयं के नाम से अथवा अपने आश्रितों/परिजनों के नाम से अथवा छदम नाम से प्रोफाइल तैयार कर सोशल मीडिया पर पेड प्रमोशन अथवा अकाउंट को मॉनेटाइज कराया जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसी प्रकार शासकीय अथवा व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी व्यक्तिगत व्यवसाय, कंपनी, उत्पाद अथवा सेवा का प्रचार-प्रसार किया जाना भी प्रतिबंधित रहेगा। ऐसा कृत्य म०प्र० सिविल सेवा आचरण नियम 16 के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा। उपरोक्तानुसार सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मस से स्वयं के अथवा अपने आश्रितों/परिजनों के बैंक खातों में अथवा अन्य माध्यमों से किसी भी प्रकार की आय प्राप्त की गई हो, तो इन दिशा निर्देशों के जारी होने के दिनांक से 30 दिवस के भीतर इसका पूर्ण विवरण विभाग को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किए जाएं।
- ऐसी कोई टिप्पणी अथवा फोटो या AI जेनरेटेड अथवा अन्यथा निर्मित सामग्री जो कि दुर्भावनापूर्ण, अश्लील, जाति, धर्म, लिंग अथवा अन्य किसी प्रकार से किसी वर्ग के साथ पक्षपात को प्रदर्शित करती हो पोस्ट ना की जाए, न ही ऐसी किसी पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी जाए।
- विशिष्ट अथवा अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के दौरान ड्यूटी में लगे अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा महत्वपूर्ण स्थलों के फोटो अथवा सेल्फी आदि सोशल मीडिया में कदापि पोस्ट न की जाएं, न ही ऐसे कोई ब्यौरे पोस्ट किए जाएं जिससे सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो। इसी प्रकार हथियारों के प्रशिक्षण, ड्रिल, चांदमारी, दबिश एवं अन्य संवेदनशील कार्रवाई के फोटो अथवा वीडियो पोस्ट अथवा लाइव करना पूर्णतया प्रतिबंधित होगा।
- त्रुटिपूर्ण, अनधिकृत अथवा अपुष्ट तथ्यों के साथ किसी प्रकार की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया समूहों में न दी जाए।
- विभाग की उपलब्धियों को पुलिस बल की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिये, न कि किसी एक अधिकारी के व्यक्तिगत प्रयासों या उपलब्धियों के रूप में।
- किसी भी शिकायत जांच, विवेचना तथा जनसुनवाई आदि के दौरान पीड़ित, साक्षी, आवेदक, अनावेदक एवं आरोपी आदि के फोटो अथवा वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट अथवा लाइव करना निजता के अधिकार का उल्लंघन है अतः किसी भी स्थिति में ऐसे फोटो वीडियो आदि पोस्ट न किए जाएं। जहां आवश्यक हो वहां चेहरे ब्लर कर एवं अनुमति उपरांत ही पोस्ट किए जाएं।
- किसी भी अपराध जिसकी विवेचना जारी हो अथवा न्यायालय में लंबित हो, इससे संबंधित ऐसी जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं की जाएगी जिससे विवेचना अथवा अभियोजन पर विपरीत प्रभाव पड़े।
- किसी भी दुष्कृत्य एवं यौन हिंसा से पीड़ित महिला एवं बालिका, किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम अंतर्गत चाइल्ड इन कंफ्लिक्ट विद लॉ, चाइल्ड इन नीड ऑफ केयर एंड प्रोटेक्शन आदि के फोटो, वीडियो एवं अन्य पहचान सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं किए जाएं।
- सोशल मीडिया पर न्यायालयीन निर्देशों, निर्णयों आदि के संबंध में ऐसी कोई टिप्पणी या प्रतिक्रिया पोस्ट नहीं की जाए जिससे माननीय न्यायालय की अवमानना की स्थिति पैदा हो।
- सोशल मीडिया पर ऐसे किसी व्यक्ति की मित्रता स्वीकार न की जाए जिनका आचरण संदिग्ध, असामाजिक छवि अथवा आपराधिक रिकॉर्ड हो, न ही ऐसे व्यक्तियों को फॉलो अथवा कोलेबोरेट किया जाए। इसी प्रकार अपने शासकीय अथवा व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसे व्यक्तियों के साथ फोटो, वीडियो अथवा अन्य सामग्री पोस्ट/साझा नहीं की जाएगी, जो आपराधिक अथवा गैर-सामाजिक गतिविधियों में लिप्त हों अथवा रहे हों।
- पुलिस यूनिफॉर्म, पुलिस वाहन तथा शासकीय अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग करते हुए पुलिस अधिकारी अथवा कर्मचारियों के परिजनों अथवा मित्रों द्वारा कोई भी वीडियो अथवा फोटो अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं किया जाए न ही स्वयं पुलिस की वर्दी में रहते हुए ऐसे पारिवारिक कार्यक्रमों की पोस्ट शेयर करें जो वर्दी की गरिमा के प्रतिकूल हो।
- पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में रहते हुए किसी भी प्रकार के सांकेतिक विरोध से संबंधित प्रतीक या चिन्ह को सोशल मीडिया की प्रोफ़ाइल पिक अथवा डीपी आदि में प्रयोग नहीं किया जाए न ही प्रोफ़ाइल पिक अथवा डीपी में किसी संगठन या राजनीतिक पार्टियों के लोगो या प्रतीक चिन्ह का उपयोग किया जाए।
- सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रचलित ऑनलाइन वोटिंग अथवा ऑनलाइन पोल पर किसी भी सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट से बिना अनुमति के भाग नहीं लिया जाएगा।
- शासकीय एवं व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी, जो कि शासन तंत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हो अथवा शासकीय निर्देशोंव नीतिगत व्यवस्थाओं तथा अन्य संवेदनशील मुद्दों से संबंधित हो।
- सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर व्यक्तिगत एकाउंट बनाते समय शासकीय CUG सिम, इण्टरनेट, वाईफाई, आईपी एड्रेस, ई-मेल आईडी का प्रयोग नहीं किया जायेगा न ही व्यक्तिगत मोबाइल पर शासकीय सोशल मीडिया को Login किया जाएगा।
- पुलिस प्रक्रिया में आने वाली किसी भी तरह की जांच अथवा विवेचना के दौरान जब्त की गई सामग्री एवं हथियार आदि को बिना सीलबंद किये फोटो अथवा वीडियो को सरकारी एवं व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट नहीं किया जाएगा।
- शासकीय एवं व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शासन के निर्णय एवं नीतियों, विभाग की कार्यपद्धति की आलोचना अथवा अपने से किसी वरिष्ठ अधिकारी या अपने सहकर्मी के विरुद्ध पद की गरिमा के विपरीत कोई टिप्पणी नहीं की जायेगी।
- शासकीय कार्य के समय सोशल मीडिया का व्यक्तिगत उपयोग करने से शासकीय कार्य प्रभावित होने के साथ-साथ बहुमूल्य शासकीय समय का भी अपव्यय होता है। अतः शासकीय एवं विभागीय हित में सभी पुलिसकर्मियों द्वारा ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के अनावश्यक उपयोग को प्रतिबंधित किया जाता है।
- पुलिसकर्मियों द्वारा ऐसी कोई पोस्ट अथवा सामग्री शासकीय एवं व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा नहीं की जायेगी, जिससे कि विभाग में असंतोष अथवा वैमनस्य की भावना प्रसारित होती हो।
- पुलिस बल के सदस्यों द्वारा बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के ऐसी कोई जानकारी सरकारी अथवा व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा नहीं की जायेगी, जो कि पुलिस की टैक्टिक्स, फील्ड क्राफ्ट या अपराध के अन्वेषण में प्रयुक्त होने वाली तकनीक एवं कार्यप्रणाली को प्रकट करती हो।
- सेवा से संबंधित शिकायतों हेतु सोशल मीडिया को माध्यम बनाना अनुशासन के विपरीत है। अतः अपने वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष अपनी समस्या/ग्रीवांस रखी जाएं।
बता दें कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील पोस्ट किया जाना कदाचार की श्रेणी में आता है और अनुशासन के विपरीत है।
इससे पहले मध्य प्रदेश से ही एक खबर सामने आई थी, जहां नशे में धुत सिपाही का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद SP ने आरोपी सिपाही के खिलाफ सख्त एक्शन लिया था।
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