भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को अधिक सुलभ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। शहर में आज यानी 27 जुलाई से इलेक्ट्रिक बसों का पैसेंजर ट्रायल शुरू होने जा रहा है। अगले 5 दिनों तक चलने वाले इस ट्रायल में शहरवासी 10 ई-बसों में सफर कर सकेंगे।
इससे पहले, बीते 5 दिनों तक इन बसों का रूट पर खाली संचालन (ड्राई रन) किया गया था, ताकि मार्गों की खामियों, टर्निंग पॉइंट्स और ट्रैफिक स्थिति का आंकलन कर आवश्यक सुधार किए जा सकें।
2 शिफ्टों में होगा संचालन
ई-बसों का संचालन यात्रियों की सुविधा के लिए दो शिफ्टों में किया जाएगा। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक, दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगी।
ट्रायल के दौरान बसों को शहर के 3 प्रमुख रूटों पर चलाया जाएगा। पहला चिरायु अस्पताल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन (वाया बैरागढ़-चिचली। दूसरा चिरायु अस्पताल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन। तीसरी डीबी मॉल से कोच फैक्ट्री।
भोपाल में अब तक 21 इलेक्ट्रिक बसें
नगर निगम और परिवहन प्रबंधन के अनुसार, भोपाल में अब तक 21 इलेक्ट्रिक बसें आ चुकी हैं। अगले 10 से 12 दिनों के भीतर 20 और नई ई-बसों की खेप पहुंचने की संभावना है, जिससे शहर में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़कर 41 का हो जाएगा।
बसों के सुचारू संचालन के लिए बैरागढ़ डिपो में चार्जिंग स्टेशन तैयार कर लिया गया है, जहां 11 चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए गए हैं। इससे नियमित संचालन शुरू होने पर चार्जिंग से जुड़ी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
5 दिवसीय पैसेंजर ट्रायल के सफल और सुचारू समापन के बाद, ई-बसों के व्यावसायिक व नियमित संचालन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देकर इसे आम जनता के लिए पूरी तरह से समर्पित कर दिया जाएगा।
ई-बसों से फायदा क्या है?
ई-बसें पारंपरिक डीजल/सीएनजी बसों की तुलना में काफी लाभदायक साबित होती हैं। ये पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और संचालन के लिहाज से बेहतर हैं। इससे जीरो टेलपाइप उत्सर्जन होता है, जो शहरों में वायु प्रदूषण कम करने में सहायक है।
ई-बसें ग्रीनहाउस गैसों को काफी घटाती हैं। इन बसों में आवाज कम होती है, जिससे ध्वनि प्रदूषण नहीं होता है।
कम ऑपरेटिंग कॉस्ट और मेंटेनेंस खर्च कम होने की वजह से ये आर्थिक लिहाज से भी बेहतर है। बेहतर एक्सीलरेशन और स्मूथ ड्राइविंग से यात्री अनुभव अच्छा होता है। लंबे समय में ये पर्यावरण के लिए अच्छी और आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो रही हैं।
हाल ही में राजस्थान की सड़कों पर भी इलेक्ट्रिक बसें उतरी थीं और मुख्यमंत्री ने 47 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
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