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मध्य प्रदेश विधानसभा में UCC विधेयक पेश, काले कपड़े में पहुंचे कांग्रेस विधायक पर भड़के रामेश्वर शर्मा

भारी हंगामे के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया। कांग्रेस ने पूरक कार्यसूची के जरिए बिल लाने पर आपत्ति जताई, जबकि बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने विरोध कर रहे कांग्रेस विधायकों पर तीखा हमला बोला।

UCC bill- India TV Hindi
Image Source : ATIF AQUEEL, RAMESHWAR SHARMA FB आतिफ अकील और रामेश्वर शर्मा।

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 को विधानसभा के पटल पर रख दिया है। सरकार के इस कदम को जहां सत्ता पक्ष प्रदेश के इतिहास में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया है। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री गौतम टेटवाल ने सदन में इस बिल को प्रस्तुत किया, जिसके बाद विपक्ष की ओर से ज़ोरदार नारेबाजी शुरू हो गई। भारी विरोध-प्रदर्शन और आक्रामक तेवरों के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने इस विधेयक को रिकॉर्ड पर ले लिया है। अब इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन में कल विस्तृत चर्चा होनी तय मानी जा रही है, जिससे आगामी सत्र के बेहद गर्मागर्म रहने के आसार हैं।

काले कपड़ों पर सियासत और रामेश्वर शर्मा का तीखा हमला

विधेयक का विरोध करने के लिए भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील सदन में काले कपड़े पहनकर पहुंचे, जिस पर राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक के इस अंदाज पर भोपाल हुजूर से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यूसीसी लागू होने से उन मुल्ला-मौलवियों को घबराहट हो रही है जो अब इसके बाद हलाला, तीन-चार शादियां और तीन तलाक जैसी प्रथाओं को अंजाम नहीं दे पाएंगे। रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भी इन्हीं तत्वों की भाषा बोल रही है। उन्होंने आगे कहा कि आतिफ अकील काले कपड़े पहनें या पीले, इससे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन प्रदेश में अब किसी भी तरह के काले कारनामे नहीं चलने दिए जाएंगे।

विपक्ष ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल

दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस विधेयक को पेश करने के सरकारी तौर-तरीकों पर गंभीर आपत्ति जताई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई कांग्रेस विधायकों ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह विधेयक मूल कार्यसूची का हिस्सा नहीं था। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने मुख्य एजेंडे में इसे शामिल न करके आखिरी वक्त पर सप्लीमेंट्री कार्यसूची के जरिए पिछले दरवाजे से विधेयक को पेश करने की जानकारी दी। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस प्रक्रिया पर सबसे तीखा वार करते हुए बयान दिया कि सरकार ने चोरों की तरह छिपकर इस बिल को सदन के पटल पर रखा है।

कल होगी आर-पार की जंग

सप्लीमेंट्री कार्यसूची के जरिए विधेयक लाने के आरोप पर सरकार की ओर से मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने पलटवार किया है, जबकि कांग्रेस की तरफ से जयवर्धन सिंह और उमंग सिंघार लगातार प्रक्रियागत खामियों को लेकर आक्रामक बने हुए हैं। विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद सरकार इस बिल को पारित कराने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दे रही है। कार्यसूची को लेकर छिड़े इस विवाद और बीजेपी-कांग्रेस विधायकों के बीच निजी स्तर पर शुरू हुई जुबानी जंग के बाद अब सबकी निगाहें कल होने वाली चर्चा पर टिकी हैं, जहां दोनों ही पक्ष सदन के भीतर आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं।

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