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‘JCB आ गई है, पहुंचो...’ उज्जैन में बवाल से पहले साजिद-इमरान ने क्या किया? सामने आया वीडियो

उज्जैन में शाही मस्जिद विवाद से पहले सोशल मीडिया पर जेसीबी आने की अफवाह फैलाने वाले साजिद और इमरान समेत 5 लोगों की पहचान हुई है। पुलिस ने 15 गिरफ्तारियां और 100 से ज्यादा भड़काऊ कंटेंट हटाने की कार्रवाई की है।

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Image Source : INDIA TV उज्जैन में अफवाहें फैलने के बाद भारी बवाल हुआ था।

Highlights

  • साजिद और इमरान के वीडियो सामने आए, पुलिस का दावा- अफवाह फैलाकर लोगों को बुलाया गया।
  • गुलरेज खान, बिल्लू पठान और आरिफ पठान की भी भड़काऊ रील में पहचान हुई।
  • पूरी मस्जिद नहीं, सड़क की तरफ का सिर्फ 3 से 3.5 फीट हिस्सा हटाया जा रहा था।

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद को लेकर हुए पथराव और उपद्रव के मामले में पुलिस ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने और लोगों को भड़काने वालों की पहचान शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, साजिद खान और इमरान नाम के युवकों ने घटना से एक रात पहले सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और रील पोस्ट किए, जिनमें दावा किया गया कि शाही मस्जिद को तोड़ने के लिए पुलिस जेसीबी और पोकलेन मशीन लेकर पहुंच गई है। पुलिस का कहना है कि इन पोस्ट के बाद लोगों को मस्जिद के पास पहुंचने के लिए कहा गया। इसके अलावा गुलरेज खान, बिल्लू पठान और आरिफ पठान की ओर से भी भड़काऊ रील बनाए जाने की बात सामने आई है।

उज्जैन में हो रहा है चौड़ीकरण का काम

उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ को देखते हुए शहर में सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी क्रम में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर के बीच सड़क को करीब 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इसके लिए सड़क के रास्ते में आ रहे मकान, दुकान और धार्मिक ढांचों के कुछ हिस्सों को हटाया जा रहा है। प्रशासन के मुताबिक, इस कार्रवाई में  मुख्यमंत्री मोहन यादव के पुश्तैनी घर और उनकी बहन के घर तक को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया गया है। इस पूरे क्षेत्र में करीब 80 धार्मिक ढांचों को हटाया जाना है, जिनमें अब तक करीब 20 मंदिरों को हटाया जा चुका है। जिस रास्ते पर शाही मस्जिद स्थित है, वहां भी सड़क चौड़ीकरण के लिए 5 मंदिर हटाए जा चुके हैं। इन मंदिरों के कुछ हिस्से लोगों ने खुद हटाए हैं, ताकि सड़क चौड़ी करने के काम में परेशानी न हो।

मस्जिद को लेकर कैसे फैली अफवाह?

प्रशासन, नगर निगम और शाही मस्जिद कमेटी के बीच रविवार रात ही बातचीत हो चुकी थी। इसमें मस्जिद कमेटी सड़क की तरफ आने वाले करीब 3 से 3.5 फीट हिस्से को खुद हटाने के लिए तैयार हो गई थी। लेकिन इसके बाद सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैल गई कि पूरी शाही मस्जिद को जेसीबी से गिराया जा रहा है। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जमा हो गए। अंदर और बाहर लोगों ने धरना शुरू कर दिया और बाद में पुलिस पर पथराव भी हुआ। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इलाके में करीब 2 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती करनी पड़ी। इसके बाद हालात पर काबू पाया जा सका।

साजिद और इमरान के वीडियो आए सामने

पुलिस की जांच में सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए कुछ वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में साजिद नाम का युवक कहता दिखाई दे रहा है कि जेसीबी आ गई है और 27 सितंबर को सुबह 9 बजे सभी लोग वहां पहुंचें। वह यह भी कहता है कि पुलिस वाले मौके पर पहुंच चुके हैं। दूसरे वीडियो में इमरान शाही मस्जिद के बाहर का वीडियो दिखाते हुए दावा करता है कि पुलिस प्रशासन जेसीबी और पोकलेन मशीन लेकर खड़ा है। वह लोगों से जल्द से जल्द मस्जिद के पास पहुंचने की अपील करता है। पुलिस का आरोप है कि ऐसे वीडियो और पोस्ट ने लोगों के बीच गलत सूचना फैलाने में भूमिका निभाई और इसके बाद भीड़ मौके पर जमा हुई।

तीन और लोगों की भी हुई है पहचान

पुलिस के मुताबिक, साजिद खान और इमरान के अलावा तीन अन्य सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर की भी पहचान की गई है। इनमें गुलरेज खान, बिल्लू पठान और आरिफ पठान शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन लोगों की ओर से भी भड़काऊ रील और कंटेंट पोस्ट किए गए थे। पुलिस अब पत्थरबाजी करने वालों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अब तक इस मामले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से 100 से ज्यादा कंटेंट हटवाए गए हैं और 100 से ज्यादा इंस्टाग्राम अकाउंट भी बंद कराए जा चुके हैं।

सिर्फ आगे का हिस्सा हटाया जा रहा

इस मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि प्रशासन के मुताबिक पूरी शाही मस्जिद को गिराने की कार्रवाई नहीं हो रही थी। सड़क की तरफ मस्जिद का करीब 3 से 3.5 फीट हिस्सा सड़क चौड़ीकरण की सीमा में आ रहा था। इसी हिस्से को हटाने पर सहमति बनी थी। यानी सोशल मीडिया पर जिस तरह पूरी मस्जिद को जेसीबी से गिराने की बात कही गई, प्रशासन के मुताबिक वास्तविक स्थिति उससे अलग थी। मस्जिद कमेटी को भरोसे में लेकर सड़क की तरफ आने वाले हिस्से को हटाने की प्रक्रिया तय की गई थी।

मंदिरों के हिस्से भी हटाए गए

सड़क चौड़ीकरण के लिए सिर्फ शाही मस्जिद के हिस्से को ही नहीं हटाया जा रहा है, बल्कि कई मंदिरों के हिस्से भी हटाए गए हैं। इनमें गणेश मंदिर, हनुमान मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिर समेत कई धार्मिक स्थल शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ मंदिरों के हिस्से लोगों ने खुद हटाए हैं, ताकि सड़क चौड़ीकरण का काम आगे बढ़ सके। संकट मोचन हनुमान मंदिर भी इसी करीब 900 मीटर लंबे रास्ते पर है। बताया गया है कि मंदिर का करीब 10 फीट हिस्सा सड़क की तरफ आ रहा था। करीब 100 साल पुराने इस मंदिर का जरूरी हिस्सा हिंदू समाज की सहमति से हटाया गया। इसी तरह इस रास्ते पर कुछ मंदिर करीब 100 साल, कुछ करीब 150 साल और कुछ करीब 250 साल पुराने बताए जा रहे हैं।

शहर काजी ने लोगों से शांति की अपील की थी

उज्जैन के शहर काजी ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से कहा था कि वे घरों में रहें और बिना वजह बड़ी संख्या में मस्जिद के आसपास जमा न हों। हालांकि, पुलिस के मुताबिक शहर काजी को भी विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ा। उनके घर के बाहर नारेबाजी की गई और इस्तीफा देने की मांग की गई। इस्तीफा नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप है। पुलिस के मुताबिक, कुछ उपद्रवी उनके घर में घुस गए और तोड़फोड़ की। घर के बाहर लगे CCTV कैमरों को भी नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि ऐसा सबूत मिटाने के लिए किया गया। इस मामले में भी FIR दर्ज की गई है।

अफवाह और हकीकत में क्या अंतर?

उज्जैन के इस पूरे मामले में विवाद का मुख्य कारण सोशल मीडिया पर फैली वह अफवाह रही, जिसमें दावा किया गया कि शाही मस्जिद को पूरी तरह जेसीबी से गिराया जा रहा है। वहीं, प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुई सहमति के मुताबिक सड़क की तरफ आने वाले करीब 3 से 3.5 फीट हिस्से को ही हटाया जाना था। यानी कार्रवाई पूरी मस्जिद को गिराने की नहीं, बल्कि सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आ रहे बाहरी हिस्से को हटाने की थी। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि सोशल मीडिया पर अफवाह किसने शुरू की, किन लोगों ने उसे आगे बढ़ाया और किस तरह लोगों को मौके पर पहुंचने के लिए कहा गया। इसी जांच के दौरान साजिद, इमरान, गुलरेज खान, बिल्लू पठान और आरिफ पठान की भूमिका सामने आने की बात पुलिस की ओर से कही गई है।

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