मुंबई: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बीएमसी (BMC) में चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है। बीएमसी के लिए 15 जनवरी 2026 को वोट डाले जाएंगे लेकिन उससे पहले ही सभी सियासी दल तमाम समीकरणों को लेकर गुणा-भाग करने में जुटे हैं। इस चुनाव में मुस्लिम वोट सबसे अहम है। बीएमसी की कुल 227 सीटों में से लगभग 45 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव सबसे अहम माना जा रहा है।
कितनी सीटों पर हार-जीत का फैसला करेंगे मुस्लिम मतदाता
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक मुंबई की 30 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता 'निर्णायक' स्थिति में हैं। इन क्षेत्रों में मुस्लिम वोट बैंक जिस तरफ झुकेगा, उसी उम्मीदवार की जीत तय मानी जा रही है। इसके अलावा, अन्य 15 सीटों पर भी यह मुस्लिम समुदाय उम्मीदवारों की हार-जीत तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
'अल्पसंख्यक' वोट बैंक पर सियासी दलों की नजरें
मुंबई के भायखला, मुंबादेवी, मानखुर्द-शिवाजी नगर, कुर्ला और अंधेरी जैसे इलाकों में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद है। ऐसे में महाविकास अघाड़ी (शिवसेना UBT, कांग्रेस, NCP-SP) और महायुति के साथ-साथ समाजवादी पार्टी और AIMIM जैसे दल भी इन 45 सीटों पर अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुस्लिम वोटों का बिखराव रोकने या उन्हें अपने पाले में करने के लिए सभी दलों ने विशेष रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। 16 जनवरी को आने वाले नतीजे यह साफ कर देंगे कि मुंबई की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी।
मुंबई में मुस्लिम आबादी
- मानखुर्द–शिवाजी नगर: 53%
- मुंबा देवी: 50.9%
- भायखला : 41.5%
- वर्सोवा: 33.5%
- धारावी: 33.4%
- वांद्रा ईस्ट: 33.1%
- कुर्ला (SC): 30.7%
- अनुशक्ति नगर: 28.8%
- मालाड वेस्ट: 27.7%
- चांदिवली: 27.6%
- अंधेरी वेस्ट: 27.1%
- वांद्रा वेस्ट: 25.3%
यदि पिछली आंकड़ों पर नजर डालें तो 2017 की बीएमसी चुनाव में 31 मुस्लिम पार्षद विभिन्न पार्टियों से चुने गए थे। इनमें से कांग्रेस 11, समाजवादी पार्टी 6, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी 4, एमआईएम 3, शिवसेना 2 और 5 उम्मीदवार निर्दलीय चुने गए थे।