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यह 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं, बल्कि 'ऑपरेशन देवेंद्र फडणवीस' है, किस पर भड़के आदित्य ठाकरे?

उद्धव की शिवसेना को फिर एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के सीनियर नेता सचिन अहीर ने औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है, जिन्हें आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। जानें क्यों नाराज हुए आदित्य ठाकरे?

आदित्य ठाकरे क्यों हुए नाराज- India TV Hindi
आदित्य ठाकरे क्यों हुए नाराज

महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज है। उद्धव की शिव सेना को झटके पर झटके लग रहे हैं। अब यूबीटी के लिए एक और बड़ा झटका यह है कि वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर ने औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। सबसे बड़ी बात ये है कि आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद सहयोगी माने जाने वाले सचिन अहीर ने पाला बदलने के तुरंत बाद महाराष्ट्र विधान परिषद के उप-सभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। उनके इस कदम को महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर-3' के तौर पर देखा जा रहा है, और शिंदे गुट का दावा है कि उद्धव खेमे के कई विधायक भी जल्द ही पाला बदल लेंगे।

आदित्य ठाकरे क्यों हुए नाराज?
उद्धव के बेटे और शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने सचिन अहीर के पाला बदलने पर अपनी नाराजगी जताई है और कहा है, यह 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं, बल्कि 'ऑपरेशन देवेंद्र फडणवीस' है। शिवसेना यूबीटी MLC सचिन अहीर के महायुति में शामिल होने पर आदित्य ठाकरे ने कहा, इससे शिव सेना  पर कोई असर नहीं होगा। आदित्य ने कहा अहीर ने पार्टी में अहम ज़िम्मेदारियां संभाली थीं, लेकिन निजी स्वार्थ के कारण आज पाला बदल लिया और पार्टी छोड़कर उस गुट में शामिल हो गए हैं। 

कौन हैं सचिन अहीर?
सचिन अहीर न केवल शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता थे, बल्कि मुंबई में, खासकर वर्ली निर्वाचन क्षेत्र में, उन्हें आदित्य ठाकरे का दाहिना हाथ माना जाता था। साल 2019 में, जब आदित्य ठाकरे ने अपना पहला चुनाव लड़ा था, तो सचिन अहीर उस समय NCP में थे और  उनको शिवसेना में शामिल किया गया और उन्हें वर्ली की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई।

सचिन अहीर के रूप में आदित्य के सबसे करीबी सहयोगी और मुंबई के लिए अहम रणनीतिकार को अपने पाले में लाकर, एकनाथ शिंदे ने मातोश्री की चुनावी रणनीति को तोड़ने की कोशिश की है। इस घटनाक्रम से आदित्य ठाकरे की राजनीतिक समझ पर भी सवाल उठते हैं और उद्धव ठाकरे के संगठन को मजबूत करने के हालिया दावों पर भी असर पड़ता है।

आदित्य ठाकरे ने क्या क्या कहा?
अपने करीबी सहयोगी के पाला बदलने पर प्रतिक्रिया देते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने अहीर को सब कुछ दिया, फिर भी उन्होंने पार्टी छोड़ दी, जो उनके सिद्धांतों की कमी को दिखाता है। ठाकरे ने कहा, जीवन में कुछ सिद्धांत होने चाहिए। अगर पार्टी आपको सब कुछ देती है, तो मुश्किल समय में आपको पार्टी के साथ खड़ा होना चाहिए। गुस्से में ठाकरे ने कहा, उन्हें मेरे पास लाओ और मैं उनसे पूछूंगा कि पार्टी ने उन्हें क्या नहीं दिया।

एकनाथ शिंदे ने क्या कहा?
सचिन अहीर का अपनी पार्टी में स्वागत करते हुए, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें राजनीति का तेंदुलकर बताया और कहा कि, उन्होंने तो छक्का मारा है। शिंदे ने कहा, "वह ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ता हैं और लोग उनकी राजनीति करने के तरीके को पसंद करते हैं। शिंदे ने कहा, अब वह हमारे खिलाड़ी हैं जो बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग, सबकुछ करेंगे।"

शिवसेना के महाराष्ट्र मंत्री संजय शिरसाट ने इस कदम को एकनाथ शिंदे का "ऑपरेशन इमरजेंसी" बताया। शिरसाट ने कहा, "सचिन अहीर का शिवसेना में आना एक अहम बात है। वह एक मेहनती नेता हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हमारे साथ आए हैं। यह कोई ऑपरेशन टाइगर नहीं है। यह एकनाथ शिंदे द्वारा चलाया गया ऑपरेशन इमरजेंसी है। हम महाविकास अघाड़ी को खत्म नहीं करना चाहते, लेकिन अगर उनके नेता हमारे साथ आ रहे हैं, तो हम कुछ नहीं कर सकते।"

कांग्रेस ने क्या कहा?
महाराष्ट्र में उद्धव की शिवसेना की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने अहीर के इस कदम पर हैरानी जताई और पार्टी के नेता अमीन पटेल ने कहा कि अहीर कुछ दिन पहले ही महाविकास अघाड़ी की बैठक में शामिल हुए थे।  उन्होंने कहा, मैं कुछ दिन पहले महाविकास अघाड़ी की बैठक में उनके साथ बैठा था और मुझे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि वह ऐसा कुछ करेंगे।

शिंदे ने अपने नेताओं के बजाय अहीर को चुना
बता दें कि महायुति गठबंधन में नीलम गोर्हे और कृपाल तुमाने जैसे बड़े नेता डिप्टी चेयरमैन पद के लिए कोशिश कर रहे थे। हालांकि, एकनाथ शिंदे ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को दरकिनार कर दिया और यह अहम पद विपक्ष के एक नेता सचिन अहीर को सौंप दिया। अहीर का राजनीतिक सफर एनसीपी, शिवसेना यूबीटी और अब शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से होकर गुज़रा है। उनके पाला बदलने से महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल मच गई है।

शिंदे सेना के विधायक महेंद्र दलवी ने इसे आदित्य ठाकरे के लिए बहुत बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका बताया और साथ ही यह भी दावा किया कि महायुति का 'ऑपरेशन टाइगर-3' अब शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में उद्धव खेमे के कई विधायक एकनाथ शिंदे के साथ जुड़ेंगे।

सियासत क्यों गरमाई?
शिंदे गुट का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अहम नगर निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले विधान परिषद में अपनी पकड़ मज़बूत करने और उद्धव खेमे को कमज़ोर करने की कोशिशें चल रही हैं। उद्धव की शिव सेना के लिए यह ताज़ा झटका पार्टी में हाल ही में हुई बगावत के बाद लगा है, जिसमें उसके नौ में से छह सांसदों ने शिंदे सेना का दामन थाम लिया था।

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