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VIDEO: 80 लाख में बिकती थी किडनी...देने वाले को मिलता था 5 लाख, एक किसान की वजह से हुआ पर्दाफाश

किसान द्वारा किडनी बेचकर कर्ज चुकाने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। यह पूरा मामला किसान रोशन कूड़े की शिकायत के बाद सामने आया।

चंद्रपुर पुलिस अधीक्षक सुदर्शन मुमक्का ने जानकारी दी।- India TV Hindi
Image Source : REPORTER चंद्रपुर पुलिस अधीक्षक सुदर्शन मुमक्का ने जानकारी दी।

महाराष्ट्र: चंद्रपुर में किसान द्वारा किडनी बेचकर कर्ज चुकाने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश करते हुए भारत में फैले इसके नेटवर्क का खुलासा किया है।

कैसे हुआ खुलासा?

यह पूरा मामला नागभीड़ तहसील के रहने वाले किसान रोशन कूड़े की शिकायत के बाद सामने आया। रोशन ने साहूकारों से ब्याज पर लिए गए कर्ज की अदायगी के लिए अलग-अलग साहूकारों से कर्ज लिया था। कर्ज नहीं चुका पाने के दबाव में उसने अपनी किडनी बेचने का फैसला किया। जब मामला ब्रम्हपुरी पुलिस थाने पहुंचा, तो पुलिस अधीक्षक सुदर्शन मुमक्का ने इसकी गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

जांच के दौरान यह सामने आया कि शिकायतकर्ता का किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ा मामला है, जिसके चलते The Transplantation of Human Organs and Tissues Act, 1994 की धाराएं 18 और 19 भी जोड़ी गईं और इस प्रकरण में 6 साहूकारों को गिरफ्तार किया गया।

Image Source : Reporterकिसान रोशन कूड़े की शिकायत के बाद मामला सामने आया।

जांच में शिकायतकर्ता ने बताया कि वह किडनी प्रत्यारोपण के लिए कंबोडिया गया था। इस मामले में कृष्णा उर्फ रामकृष्ण सुंचू और हिमांशु भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया। तकनीकी विश्लेषण और पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि इस किडनी रैकेट के तार भारत में भी हैं। आरोपी हिमांशु भारद्वाज ने स्वीकार किया कि जुलाई 2022 में आर्थिक तंगी के कारण उसने अपनी किडनी कृष्णा उर्फ रामकृष्ण सुंचू के माध्यम से बेची थी। यह अवैध प्रत्यारोपण तमिलनाडु के त्रिची स्थित स्टॉर किम्स हॉस्पिटल में किया गया, जिसमें अस्पताल के संचालक डॉ. राजरत्नम गोविंदस्वामी और दिल्ली के डॉ. रविंद्रपाल सिंह शामिल थे।

50 से 80 लाख का काला खेल

प्राथमिक जांच में सामने आया कि किडनी लेने वाले मरीज से 50 से 80 लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी। इसमें से डॉ. रविंद्रपाल सिंह को 10 लाख रुपये, स्टॉर किम्स हॉस्पिटल के संचालक डॉ. राजरत्नम गोविंदस्वामी को सर्जरी और अस्पताल सुविधाओं के लिए 20 लाख रुपये, जबकि कृष्णा उर्फ रामकृष्ण सुंचू व अन्य एजेंटों को लगभग 20 लाख रुपये मिलते थे। किडनी दान करने वाले व्यक्ति को मात्र 5 से 8 लाख रुपये दिए जाते थे। 

नामी डॉक्टर और अस्पताल शामिल

जांच के तहत स्थानीय अपराध शाखा चंद्रपुर की एक टीम त्रिची (तमिलनाडु) स्थित स्टॉर किम्स हॉस्पिटल पहुंची और अस्पताल संचालक डॉ. राजरत्नम गोविंदस्वामी की तलाश कर रही है। वहीं, दूसरी टीम ने दिल्ली में डॉ. रविंद्रपाल सिंह को हिरासत में लिया। उन्हें ट्रांजिट रिमांड के लिए दिल्ली की संबंधित अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 2 जनवरी 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, चंद्रपुर के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है। 

अब तक इस किडनी रैकेट के कंबोडिया कनेक्शन सामने आए थे, लेकिन चंद्रपुर पुलिस की मेहनत से भारत के नामी अस्पतालों, कई डॉक्टरों और एजेंटों से जुड़े एक बड़े किडनी प्रत्यारोपण घोटाले का खुलासा हुआ है। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है।

(रिपोर्ट- मिलिंद दिंन्डेवार)

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