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इस्लामपुर अब से ईश्वरपुर... महाराष्ट्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला

महाराष्ट्र के सांगली जिले की इस्लामपुर तहसील अब से ईश्वरपुर के नाम से जानी जाएगी. महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट मीटिंग में ये बड़ा फैसला लिया गया है.

fadnavis islampur name change- India TV Hindi
Image Source : PTI फडणवीस सरकार ने इस्लामपुर का नाम क्यों बदला?

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट मीटिंग में इस्लामपुर का नाम बदलने का बड़ा फैसला लिया गया। कैबिनेट मीटिंग के बाद आदेश निकाला गया कि अब से सांगली जिले की इस्लामपुर तहसील का नाम ईश्वरपुर होगा। इस निर्णय पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने एक्स पर पोस्ट करके केंद्र सरकार का धन्यवाद किया। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने लिखा कि इस्लामपुर का नाम बदल गया- अब होगा ‘ईश्वरपुर’! ऐतिहासिक फैसला। केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के इस्लामपुर का नाम बदलकर ‘ईश्वरपुर’ करने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया है। यह मांग कई साल से यहां के नागरिकों द्वारा लगातार की जा रही थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी बार-बार विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था।

इस्लामपुर का नाम क्यों बदला?

चंद्रशेखर बावनकुले ने आगे लिखा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी ने जनता की इस मांग को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से रखा, जिसके बाद गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने यह निर्णय लेते हुए लोगों की भावनाओं का आदर किया है। इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए उन सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई, जिन्होंने इस परिवर्तन के लिए लगातार प्रयास किया और संघर्ष किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और CM देवेंद्र फडणवीस का भी इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए धन्यवाद दिया।

किन शहरों के बदल चुके हैं नाम?

जान लें कि महाराष्ट्र में इससे पहले भी कई शहरों के नाम बदले जा चुके हैं। इस लिस्ट में औरंगाबाद, उस्मानाबाद और अहमदनगर जैसे अहम नाम शामिल हैं। औरंगाबाद का नाम छत्रपति संभाजीनगर, उस्मानाबाद का नाम धाराशिव और अहमदनगर का नाम अहिल्यानगर बदलकर हो गया है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र समेत पूरे देश में नाम बदलने की राजनीति जोरों पर चल रही है। यूपी से महाराष्ट्र तक तमाम शहरों और रेलवे स्टेशनों तक के नाम बदले गए हैं। सरकारों ने नाम बदलने के पीछे की वजह को जनभावना बताया है। इसके अलावा मुगलों और अंग्रेजों के जमाने के तमाम नाम भी बदल गए हैं, जिसे गुलामी मानसिकता से छुटकारा दिलाने का फैसला कहा गया।