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फिर साथ आएंगे उद्धव और राज ठाकरे! संजय राउत बोले- 'मराठियों का हक सुरक्षित रखना है तो साथ आना पड़ेगा'

संजय राउत ने कहा कि कोई क्या बोलता है, उससे फर्क नहीं पड़ता। फर्क इससे पड़ता है कि ठाकरे क्या बोलते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मराठियों के हक के लिए सभी को साथ आना होगा।

Sanjay Raut and Uddhav thackrey- India TV Hindi
Image Source : PTI संजय राउत और उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़े बदलाव का संकेत देते हुए शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि मराठियों के हक के लिए सभी को साथ आना होगा। उन्होंने इस बात की संभावना जताई कि ठाकरे परिवार फिर से एक होकर चुनाव लड़ सकता है। मौजूदा समय में राज ठाकरे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उद्धव ठाकरे शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के प्रमुख हैं। महाराष्ट्र चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे पर हमला भी किया था।

संजय राउत से जब उद्धव और राज ठाकर के साथ आने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि राज ठाकरे ने एक इंटरव्यू दिया है और उसके बाद उन्होंने कोई और इंटरव्यू दिया। इसके बाद यह बात चर्चा में आई कि हमारा गठबंधन होगा। इस पर मैं भरोसा नहीं करता। उद्धव ठाकरे ने भी इस विषय पर एक सकारात्मक वक्तव्य दिया है। लेकिन इंटरव्यू के आधार पर चर्चा नहीं होती।"

ठाकरे क्या बोलते हैं, वह जरूरी है

संजय राउत ने महायुति के नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा "एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस एक साथ आने पर कितना मीठा बोलते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है ना। हम माननीय उद्धव ठाकरे और मनसे एक साथ जुड़ने के लिए सकारात्मक भूमिका रख चुके हैं। कोई क्या बोलता है उससे अलग ठाकरे क्या कहते हैं वह महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र की जनता के मन में यह बात है और दोनों के ऊपर इस बात का प्रेशर है। मराठी जनता का यह प्रेशर भावनात्मक है। मराठी आदमी के हक को सुरक्षित रखना है तो सभी को एक साथ आना पड़ेगा। यह माननीय उद्धव ठाकरे साहब की भी भूमिका है और हमने इस पर चर्चा की और इसके प्रयास में सकारात्मक कदम उठाना हमारे पक्ष की भूमिका है।"

2005 में बनी थी मनसे

राज ठाकरे ने 2005 में अविभाजित शिवसेना छोड़ दी थी और अगले साल अपनी खुद की पार्टी बनाई। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) की कट्टर प्रतिद्वंद्वी भाजपा के साथ कई बार गठबंधन किया है। इस साल के अंत में महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं, जिनमें मुंबई, ठाणे, नासिक, नागपुर और पुणे के नगर निगम शामिल हैं। इन चुनावों से पहले दोनों दलों के साथ आने के कयास लगाए जा रहे हैं। 2014 और 2017 में मनसे की तरफ से शिवसेना को गठबंधन का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन दोनों मौकों पर इसे स्वीकार नहीं किया गया।