गढचिरौलीः माओवाद प्रभावित और अत्यंत दुर्गम माने जाने वाले गढ़चिरौली ज़िले के मरकानार गांव से अहेरी तक आज़ादी के बाद पहली बार महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम (एसटी) की बस सेवा शुरू की गई है। यह पहल गढ़चिरौली पुलिस बल के प्रयासों और नागरिक सहभागिता के चलते संभव हो सकी, जिससे क्षेत्र के हजारों नागरिकों को राहत मिली है।
तिरंगा लहराकर और मिठाइयां बांटकर लोगों ने मनाया जश्न
बस सेवा के शुभारंभ के अवसर पर नागरिकों ने राष्ट्रीय ध्वज लहराकर और मिठाइयां बांटकर उल्लास के साथ इसका स्वागत किया। उद्घाटन समारोह में ग्राम पाटिल श्री जुरू मालू मट्टामी, सीआरपीएफ 37 बटालियन जी कंपनी के सहायक कमांडेंट अविनाश चौधरी और कोठी पुलिस स्टेशन के प्रभारी उपनिरीक्षक दिलीप गवली प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
Image Source : india tvमरकानार से अहेरी तक आज़ादी के बाद पहली बार चली बस
इन गांवों में रहने वालों को होगा फायदा
यह ऐतिहासिक सेवा मरकानार, मुरुम्बाभुशी, फुलनार, कोपरशी, पोयारकोठी, गुंडुरवाही जैसे 1200 से अधिक जनसंख्या वाले गांवों को सीधा लाभ पहुंचाएगी। इस बस सेवा से अब ग्रामीण नागरिकों, विशेषकर मरीजों, विद्यार्थियों और यात्रियों को तहसील और जिला मुख्यालयों तक सुगम और सुरक्षित यात्रा का साधन मिलेगा।
Image Source : india tvमरकानार से अहेरी तक आज़ादी के बाद पहली बार चली बस
गढ़चिरौली जिले में पिछले कुछ वर्षों में पुलिस बल द्वारा नागरिकों के जीवनस्तर को सुधारने के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2025 में ही गट्टा-गरदेवड़ा-वांगेतुरी और कटेज़ारी-गढ़चिरौली बस सेवाएं शुरू की गईं। इसके अतिरिक्त, पुलिस सुरक्षा में अब तक 420.95 किलोमीटर लंबी सड़कें और 60 पुलों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है।
स्थानीय लोगों ने किया है नक्सलवाद का बहिष्कार
मरकानार जैसे दुर्गम गांवों तक सड़क और अब परिवहन पहुंचने से विकास की नयी राहें खुल रही हैं। उल्लेखनीय है कि मरकानार गांव के नागरिकों ने 9 फरवरी 2025 को सर्वसम्मति से नक्सलवाद का बहिष्कार करते हुए माओवादी गतिविधियों से नाता तोड़ने का ऐलान किया था। इसके बाद पुलिस संरक्षण में कोठी से मरकानार तक सड़क का निर्माण और मोबाइल नेटवर्क (एयरटेल टावर) की सुविधा प्रदान की गई।
पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल के नेतृत्व में चल रही इस परिवर्तनकारी पहल को स्थानीय नागरिकों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। यह बस सेवा न केवल परिवहन सुविधा है, बल्कि विकास, शांति और लोकतांत्रिक सहभागिता की दिशा में एक अहम कदम है।
रिपोर्ट- नरेश सहारे, गढचिरौली