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सरकारी अस्पतालों में बुखार की दवा भी नहीं निकली सही! नागपुर में वापस मंगाई गईं पैरासिटामोल की गोलियां

नागपुर के 2 बड़े सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की गई पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की दवाएं FDA की लैब जांच में निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। रिपोर्ट सामने आने के बाद दोनों दवाओं का वितरण और इस्तेमाल रोक दिया गया।

Nagpur Government Hospitals, Paracetamol Tablets Recall- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT FDA की जांच में दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।

Highlights

  • नागपुर के 2 सरकारी अस्पतालों में पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की दवाएं जांच में फेल हुईं।
  • FDA के निर्देश के बाद सवा लाख से ज्यादा पैरासिटामोल गोलियों का वितरण तत्काल रोक दिया गया।
  • अस्पताल प्रशासन ने कहा, दूसरी कंपनियों की पर्याप्त दवाएं मौजूद हैं, इसलिए संकट नहीं होगा।

नागपुर: महाराष्ट्र में नागपुर के 2 बड़े सरकारी अस्पतालों में सरकारी सप्लाई से पहुंची दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इस्तेमाल के लिए भेजी गई पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की दवाएं जांच में निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। अन्न एवं औषधि प्रशासन यानी कि FDA की लैब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद दोनों अस्पतालों को इन दवाओं का वितरण और इस्तेमाल तत्काल रोकने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अस्पतालों में मौजूद पूरा स्टॉक वापस लेने को कहा गया है।

दवाओं का वितरण रोक दिया गया

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के सुपरिंटेंडेंट डॉ. अविनाश गावंडे ने बताया कि FDA का पत्र मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने करीब सवा लाख पैरासिटामोल की गोलियां वापस ले ली गई हैं। अब इन गोलियों का वितरण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में दूसरी कंपनियों की करीब ढाई लाख पैरासिटामोल की गोलियां पहले से मौजूद हैं। इसलिए मरीजों को पैरासिटामोल की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और दूसरी कंपनियों की दवाओं का वितरण जारी है।

रंग को लेकर FDA ने जताई आपत्ति

डॉ. अविनाश गावंडे के मुताबिक, FDA की जांच रिपोर्ट में पैरासिटामोल की गोलियों के रंग को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। इसी आधार पर जांच में लिए गए नमूने को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं माना गया। उन्होंने बताया कि यह दवा जुलाई महीने में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में पहुंची थी। FDA का पत्र मिलने के बाद इसका वितरण रोककर उपलब्ध स्टॉक वापस मंगा लिया गया।

दवाओं की सप्लाई कहां से हुई थी?

डॉ. गावंडे ने बताया कि अस्पताल में दवाओं की खरीद के लिए अलग ड्रग परचेज डिपार्टमेंट है और फार्माकोलॉजी विभाग के HOD ड्रग खरीद से जुड़ी व्यवस्था देखते हैं। उन्होंने बताया कि बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में कुछ दवाएं धीमी गति से इस्तेमाल हो रही थीं, इसलिए वहां से ये दवाएं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल नागपुर और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल नागपुर को भेजी गई थीं।

डॉ. गावंडे के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज में पहले से पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध हैं। इसलिए संबंधित दवाओं को वापस बुलाए जाने के बावजूद मरीजों के इलाज में दवा का कोई संकट नहीं है। उन्होंने बताया कि जिस जगह से अस्पताल नियमित रूप से दवाएं खरीदता है, वहां करीब 2.40 लाख दवाओं का स्टॉक उपलब्ध है। ऐसे में वापस ली गई दवाओं की वजह से अस्पताल में दवाओं की कमी की स्थिति नहीं है।

ब्लड प्रेशर की दवा भी जांच में फेल

FDA की जांच में केवल पैरासिटामोल ही सवालों के घेरे में नहीं आई। उच्च रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर के मरीजों को दी जाने वाली एक दवा का नमूना भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। बुखार और शरीर में दर्द के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली पैरासिटामोल की जांच में उसके बाहरी स्वरूप से जुड़ी खामी सामने आई। वहीं ब्लड प्रेशर की दवा के नमूने को भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद मेडिकल प्रशासन ने दोनों तरह की दवाओं के वितरण पर तत्काल रोक लगा दी।

अगस्त में लिए गए थे दवाओं के सैंपल

अन्न एवं औषधि प्रशासन की ओर से सरकारी अस्पतालों में दवाओं की नियमित जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत अगस्त महीने में पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की दवाओं के नमूने लिए गए थे। प्रयोगशाला जांच के बाद इन नमूनों की रिपोर्ट निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं आई। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सरकारी अस्पतालों को इन दवाओं का वितरण तुरंत रोकने और उपलब्ध स्टॉक वापस लेने के निर्देश दिए गए। बता दें कि हाल ही में कैंसर की नकली दवाओं के इंटरस्टेट सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ था जिसमें 17 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे

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