भारत-पाकिस्तान मैच पर शिवसेना-यूबीटी के मुखपत्र 'सामना' में तीखा हमला, जानें क्या कहा
शिवसेना-यूबीटी ने अपने मुखपत्र 'सामना' में कहा है कि मैच जीतकर सूर्यकुमार यादव ने इसे सेना को समर्पित करने का 'ढोंग' किया।
मुंबई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र 'सामना' में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया है। संपादकीय में कहा गया है कि आखिरकार, बेशर्मी की पराकाष्ठा लांघकर दुबई में भारत-पाकिस्तान मैच खेला गया। महाराष्ट्र समेत पूरे भारत में इस मैच का वैसे बहिष्कार ही था। देशभक्तों ने मैच शुरू होते ही अपने टीवी बंद कर दिए, लेकिन बीजेपी और उसके सहयोगियों ने अपने दरवाजे-खिड़कियां बंद कर पाकिस्तानियों के साथ इस खेल का दिल से लुत्फ उठाया। हम सुनील गावस्कर का विशेष तौर पर अभिनंदन करते हैं। उन्होंने कटु सत्य कहा।
"पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने की जिद सरकार की थी"
मुखपत्र 'सामना' में कहा गया, "केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने का फैसला लिया है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड और क्रिकेटरों को इसे स्वीकार करना होगा। गावस्कर ने जो कहा, उससे मोदी सरकार के चेहरे का मुखौटा उतर गया है। नाना पाटेकर ने पाकिस्तान के साथ खेलने का विरोध किया- 'मेरे लोगों का खून बहा है। मैं उन लोगों के साथ क्यों खेलूं जिन्होंने खून बहाया?’ उन्होंने अपनी तीखी राय व्यक्त की। लंबे समय के बाद पाटेकर ने यह करारा प्रहार किया है। पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने की जिद सरकार की थी। यानी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष जय शाह की थी। यह समझना चाहिए कि जय शाह के ‘पापा’ अमित शाह दुर्भाग्य से भारत के गृह मंत्री हैं। अमित शाह ने किस योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर अपने बेटे जय शाह को भारतीय क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया?"
"भाजपा की भूमिका दो मुंह वाले केंचुए की तरह"
सामना में आगे कहा गया, "क्रिकेट में जुए और सट्टेबाजी का पैसा है, इसलिए जय शाह को विशुद्ध व्यापार के लिए क्रिकेट व्यवसाय में लाया गया। इसका देशभक्ति से कोई लेना-देना नहीं है। इस मैच ने न केवल भाजपा की देशभक्ति के ढोंग को उजागर किया है, बल्कि उसे नंगा भी कर दिया है। दिलजीत दोसांझ की एक फिल्म को भारत में रिलीज नहीं होने दिया जा रहा है। वजह, क्योंकि इसमें एक पाकिस्तानी अभिनेत्री ने काम किया है, तो फिर एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में पाकिस्तानी खिलाड़ी अब मैदान पर भारत के खिलाफ खेले और पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड ने एक दिन में 1,000 करोड़ रुपये कमाए हैं, इसे क्या कहा जाए? क्या ये देशभक्ति है? भाजपा की भूमिका दो मुंह वाले केंचुए की तरह है।"
"हमारी भारतीय क्रिकेट टीम ने क्या किया?"
इसमें कहा गया, "15 दिन पहले एक अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैच के दौरान क्या हुआ था? मैच के दौरान ब्राजील की पुलिस ने एक अर्जेंटीना समर्थक की पिटाई की। इस घटना से अर्जेंटीना की टीम इतनी नाराज हुई कि पूरी टीम यह कहते हुए मैदान छोड़कर चली गई, 'यह हमारे देश का अपमान है।' मैच खेलने से इंकार कर दिया। हमारी भारतीय क्रिकेट टीम ने क्या किया? उन्होंने उस पाकिस्तानी टीम के साथ क्रिकेट खेला, जिसने 26 निर्दोष भारतीयों को मार डाला। कहते हैं कि भारतीय टीम ने यह मैच जीत लिया। भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने क्रिकेट मैच में मिली इस फिक्सिंग जीत को सेना को समर्पित करने का ढोंग किया। यह भारतीय सेना और पुलवामा, पहलगाम के शहीदों का अपमान है। कह रहे हैं कि भारतीय कप्तान ने पाकिस्तानी कप्तान से हाथ भी नहीं मिलाया। क्यों? बताया जा रहा है कि यह पहलगाम हमले का विरोध है। अगर पाकिस्तान और उस देश की क्रिकेट टीम के खिलाफ इतना गुस्सा और नफरत है, तो खुद को राष्ट्रवादी कहनेवाली केंद्र की मोदी सरकार ने यह मैच क्यों खेलने दिया? यह ढोंग क्यों?"
"भारतीय क्रिकेट टीम सेना और युद्ध को खेल समझती है क्या?"
मुखपत्र 'सामना' में कहा गया, "एक भारतीय सैनिक देश के दुश्मन से लड़ता है और शहीद हो जाता है। वह युद्ध में नहीं जाने के लिए करोड़ों रुपये नहीं लेता। उसकी पत्नी, छोटे बच्चे और परिजन अनाथ हो जाते हैं। उनके करुण क्रंदन से धरती भी कांप उठती है, लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम को यह बात कभी समझ नहीं आई। भारतीय क्रिकेट टीम सेना और युद्ध को खेल समझती है क्या? पहलगाम हमले की शिकार पुणे के संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना आतंकवाद और निर्दोष लोगों की मौत को न्योता देना है। पाकिस्तान के साथ ऐसा खेल खेलते हुए थोड़ी शर्म तो करो!’ असावरी के ये शब्द कलेजे को चीर देनेवाले हैं, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों और हमारे क्रिकेट बोर्ड की मंडली का क्या, उनके लिए तो यह सब पैसों का खेल है।"
"इस बहाने उनके हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का ढोंग निर्वस्त्र हो गया"
मुखपत्र में आगे कहा गया, "उन्हें शर्म कैसे आ सकती है? भारत-पाकिस्तान मैच में भारत की जीत जय शाह ने ‘मनोमिलन’ के जरिए हासिल की। दुबई मैच से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को कम से कम हजार करोड़ रुपये मिले। भारत-पाक मैच पर लाखों-करोड़ों का ‘सट्टा’ खेला गया। देखिए, ये सट्टेबाज कौन हैं और कहां से हैं देखें। बताया जा रहा है कि इसमें से कम से कम 50 हजार करोड़ रुपये पाकिस्तान के जुए के सौदागरों तक पहुंचे। फिर, 'पाकिस्तान से ऐसे मैचों पर ‘सट्टा’ लगाने वाले लोग भारत से भाग गए हैं, वे मुंबई में आतंकवादी घटनाओं में शामिल हैं', इस तरह के आरोप इससे पहले ‘भाजपा’ के ही राष्ट्रभक्त मंडली ने किया है। फिर कल के मैच पर हुए ‘जुआ’ का पैसा भी वहीं गया। एक तरह से भारत में आतंकवाद फैलानेवालों के हाथ को मजबूत करने का राष्ट्रीय कार्य भाजपा सरकार ने पूरा किया। रविवार को एशिया कप में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के माध्यम से मोदीकृत भाजपा सरकार ने आतंकवादियों का खुलकर समर्थन किया और आर्थिक मदद पहुंचाई। प्रत्येक भारतीय नागरिक को इस कृत्य की निंदा करनी चाहिए। महाराष्ट्र के ‘शिंदे’ गुट ने भारतीय कप्तान सूर्यकुमार का खासतौर पर अभिनंदन किया। यह उन भारतीय महिलाओं का अपमान है जिनकी मांग से सिंदूर पोंछ दिया गया है। इसे शुद्ध हिंदी में ‘चाटुकारिता’ कहते हैं। इस बहाने उनके हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का ढोंग निर्वस्त्र हो गया। अरे, थू है तुम्हारे ढोंग पर, पाखंड पर!"
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