महाराष्ट्र के वाशिम में एक बस कंडक्टर दो साल तक बुजुर्ग महिला को ढूंढ़ता रहा। जब वह महिला उसकी ही बस में यात्रा करने के लिए बैठीं तो उसने बात करके महिला के पैसे वापस कर दिए। बस कंडक्टर की ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता की हर तरफ तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि वाशिम के इस कंडक्टर ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। उसने लोगों का भरोसा और इंसानियत दोनों को मजबूत किया है। एसटी बस के एक कंडक्टर ने दो साल पहले बस में मिले 24 हजार रुपये सुरक्षित रखवाए और आखिरकार असली मालिक की पहचान कर उन्हें वापस लौटा दिए।
संभाजीनगर से वाशिम आ रही एसटी बस में करीब दो वर्ष पहले एक यात्री के उतरने के बाद कंडक्टर राजू वाणी को 24 हजार रुपये से भरा एक बैग मिला। बैग में कासाबाई गायकवाड़ नाम की एक पर्ची भी रखी हुई थी।
कासाबाई को ढूंढ़ता रहा कंडक्टर
राजू वाणी ने बिना देर किए पैसों से भरा बैग वाशिम बस आगार प्रबंधन के पास जमा करा दिया। लेकिन उन्होंने यहीं पर बात खत्म नहीं की। वे लगातार कासाबाई गायकवाड़ की तलाश करते रहे ताकि रकम सही व्यक्ति तक पहुंच सके। करीब दो साल बाद संयोग ऐसा बना कि कासाबाई गायकवाड़ उसी बस में सफर कर रही थीं, जिसमें राजू वाणी ड्यूटी पर थे। टिकट बनाते समय आधार कार्ड पर नाम देखकर राजू वाणी को शक हुआ। पूछताछ और पूरी पहचान की पुष्टि होने के बाद उन्होंने आगार में जमा 24 हजार रुपये बुजुर्ग महिला को वापस दिलवा दिए।
पैसे वापस मिलने पर खुश हुई महिला
अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर बुजुर्ग महिला के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। वहीं राजू वाणी की ईमानदारी और जिम्मेदारी की सराहना करते हुए वाशिम बस आगार प्रबंधन ने उनका सम्मान किया। उनकी इस मिसाल की पूरे क्षेत्र में प्रशंसा हो रही है।
24 मई को खोया था बैग
बस कंडक्टर राजू ने बताया कि वह 24-5-2024 को छत्रपति संभाजी नगर से वाशिम बस पर ड्यूटी कर रहा था। बस में वृद्ध महिला का पॉकेट छूट गया था, जिसमें गोली-दवाई और 24 हजार रुपए रखे हुए थे। यह पैसे किसी भी चीज का विलंब करे बगैर एसटी डिपो में जमा कराए, जिसके बाद उस वृद्ध महिला की तलाश की, लेकिन वो नही मिली। इसके बाद वह ड्यूटी पर चला गया। हालांकि, महिला की तलाश जारी रखी। कई महीने बाद महिला दोबारा उसी बस में बैठी। बस वाशिम से अकोला जा रही थी।
बस डिपो से लौटाया पर्स
बस में सफर कर रही महिला से कंडक्टर ने आधार कार्ड मांगा और उस पर कासा बाई गायकवाड़ नाम लिखा था। कंडक्टर को लगा कि इस महिला से वह पहले मिल चुका है। उसने महिला को पूछा कि दादी जी आपके पहले कभी बस में पॉकेट कागजात पैसे गुम हो गए थे क्या? तो दादी जी ने कहा हां बेटा मेरा बैग खोया था, जिसमें 24 हजार रुपये, गोली दवाई और हॉस्पिटल के कागजात थे। सब काफी महीनों पहले बस में खो गया था। इसके बाद कंडक्टर दादी को बस डिपो में लेकर गया और उनको वो पैसे और पर्स वापस किया।
(वाशिम से इमरान की रिपोर्ट)
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