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बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा के नाम से जानी जाएगी दिल्ली की ये सड़क, असम के सीएम ने एक्स पर दी जानकारी

सीएम हिमंत विश्व शर्मा ने अपने आधिकारिक अकाउंट पर एक्स पर पोस्ट किया, "1 मई को दिल्ली में बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा और एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा, जो उनके अमूल्य योगदान के लिए श्रद्धांजलि होगी।

Himanta vishwa sarma- India TV Hindi
Image Source : FILE हिमंत विश्व शर्मा

बोडो समुदाय और भारतीय समाज में बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा के योगदान के सम्मान में गुरुवार, 1 मई को दिल्ली में उनकी एक प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा और एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोशोल मीडिया एक्स पर यह जानकारी दी।

सीएम शर्मा ने गृह मंत्री का जताया आभार

सीएम हिमंत विश्व शर्मा ने अपने आधिकारिक अकाउंट पर एक्स पर पोस्ट किया, "1 मई को दिल्ली में बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा और एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा, जो उनके अमूल्य योगदान के लिए श्रद्धांजलि होगी। एमसीडी दिल्ली ने ए5-ए18 कैलाश कॉलोनी से सड़क को बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्म मार्ग के रूप में मंजूरी दे दी है, जिसे शीघ्र ही राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा" इसके लिए सीएम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर, असम के मुख्य सचिव रवि कोटा ने भी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, ताकि दिल्ली में आगामी कार्यक्रम की तैयारियों का आकलन किया जा सके और इसका सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। 

दिल्ली में सड़क का नाम ब्रह्मा के नाम पर रखने का उद्देश्य बोडो लोगों के बीच शिक्षा, पहचान और राजनीतिक जागरूकता की वकालत करने में उनकी भूमिका को पहचानना है। हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम राष्ट्र के लिए ब्रह्मा के "अमूल्य योगदान" को उजागर करेगा।

कौन थे उपेंद्रनाथ ब्रह्मा?

 31 मार्च, 1956 को जन्मे उपेंद्रनाथ ब्रह्मा एक बोडो सामाजिक कार्यकर्ता थे। उन्होंने असम में छात्र-नेतृत्व वाली सक्रियता को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने 1978-79 में गोलपाड़ा जिला छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और बाद में 1981 और 1986 के बीच ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) के उपाध्यक्ष और उसके बाद अध्यक्ष बने। 

उनके नेतृत्व में, ABSU ने सांस्कृतिक से राजनीतिक मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित किया, जिसका उद्देश्य बोडो युवाओं में राजनीतिक परिपक्वता को बढ़ावा देना था। ब्रह्मा का निधन 1 मई, 1990 को हुआ। उनके नेतृत्व और दूरदर्शिता के सम्मान में, 8 मई, 1990 को उन्हें मरणोपरांत "बोडोफा" (बोडो के संरक्षक) की उपाधि प्रदान की गई। उनकी मृत्यु के दिन को अब हर साल बोडोफा दिवस के रूप में मनाया जाता है।